
बिलासपुर में जब से सार्वजनिक आवागमन के साधन के रूप में ऑटो रिक्शा अस्तित्व में आये है तब से अधिकांश ऑटो चालक रेलवे स्टेशन पर ही निर्भर है
बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
स्थानीय नेता शहर की व्यवस्था को तो दुरुस्त नहीं करवा पा रहे लेकिन रेलवे के निजी मामलों में दखल देकर उनकी व्यवस्थाओं को भी बेपटरी करने से बाज नहीं आ रहे । ऐसा ही मामला गुरुवार को देखा गया। बिलासपुर रेलवे स्टेशन के बाहर की व्यवस्थाओ को बेहतर करने की गरज से गुरुवार को एडीआरएम सौरव बंदोपाध्याय पहुंचे थे। उन्होंने यहां की पार्किंग व्यवस्था को बेहतर करने और परिसर के बाहर वृक्षारोपण कर सौंदर्यीकरण करने की योजना के तहत कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि स्टेशन के बाहर ऑटो चालको ने कब्जा जमाया हुआ है। हर तरफ़ बेतरतीब खड़े ऑटो जहां स्टेशन की खूबसूरती पर किसी पैबंद की मानिंद लग रहे थे, वहीं ऑटो चालकों की वजह से यहां सारी व्यवस्थाएं तार-तार हो रही थी।जिसे देखते हुए उन्होंने तत्काल ऑटो स्टैंड को हटाने का निर्देश दिया ।इसकी भनक लगते ही ऑटो चालक हमेशा की तरह लामबंद हो गए और हंगामा मचाना शुरू कर दिया। बिलासपुर में जब से सार्वजनिक आवागमन के साधन के रूप में ऑटो रिक्शा अस्तित्व में आये है तब से अधिकांश ऑटो चालक रेलवे स्टेशन पर ही निर्भर है ।अधिकांश ऑटो चालक यही स्टैंड में ही देखे जा सकते हैं। रेलवे स्टेशन से आजीविका कमाने के बावजूद इनमें हमेशा रेलवे के खिलाफ बगावती तेवर देखे जाते हैं। कई मर्तबा आरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों के साथ इनकी झड़प हो चुकी है । रेलवे क्षेत्र पूरी तरह से रेलवे के अधिकार में है और यहां निर्णय लेने का अधिकार भी रेल अधिकारियों को ही है। बावजूद इसके हमेशा से ही संगठन की शक्ति का दुरुपयोग करने वाले जिला ऑटो संघ के ऑटो चालको ने गुरुवार को यहां हंगामा मचाना शुरू कर दिया।
उनके बिगड़ते तेवर को देखकर सुरक्षाबलों को बुलाना पड़ा, मामला बिगड़ता देख जिला ऑटो संघ के सदस्यों ने इसकी सूचना बिलासपुर विधायक शैलेश पांडे को दे दी ,उन्होंने भी मामले को समझने की बजाय वोट बैंक को तवज्जो दिया और ऑटो चालकों को यह आश्वस्त कर दिया कि उन्हें उनकी जगह से कोई नहीं हटा सकता। अपने पक्ष में विधायक को पाकर ऑटो चालकों के हौसले आसमान छूने लगे और रेल अधिकारियों के सामने ही उन्होंने बेशर्म प्रदर्शन के साथ अपनी जीत का जश्न मनाया। बिलासपुर विधायक के दखल से ऑटो चालकों का प्रदर्शन भले ही थम गया लेकिन यह मामला इतनी आसानी से थमने वाला लग नहीं रहा, क्योंकि रेल अधिकारियों ने दो टूक कह दिया है कि रेलवे संबंधी निर्णय लेने में वे सक्षम है और इसमें किसी भी स्थानीय नेता को अपनी राजनीति चमकाने का अवसर रेलवे देने के मूड में नहीं है ।आखिर बिलासपुर विधायक शैलेश पांडे ने किस अधिकार से रेलवे के कार्य में दखल दिया, यह सवाल भी रेल अधिकारी कर रहे हैं। केंद्र और राज्य में अलग अलग सरकार होने की वजह से टकराव की नौबत हर स्तर पर आ रही है। इस मामले में भी रेलवे और स्थानीय विधायक के रिश्ते काफी हद तक तल्ख हुए हैं। आने वाले दिनों में इसमें क्या नया मोड़ आता है ,यह देखना दिलचस्प होगा ।बिलासपुर विधायक अपने मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते हैं लेकिन एक वर्ग से दोस्ती निभाने का खामियाजा दूसरे वर्ग को नाराज कर उन्हें उठाना पड़ रहा है।