बिलासपुर

कोविड मरीज़ो के मौत के बाद भी परिजनों की मुसीबतें नही हो रही कम, शव गायब होने से मचा बड़ा बवाल…निजी अस्पताल कर रहे लापरवाही

भुवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर – न्यायधानी में निजी हॉस्पिटलों की मनमानी थमने का नाम ही नही ले रही है। इलाज में लापवाही के बाद अब डेड बॉडी गायब होने का मामला परिजनों के लिए सिरदर्दी बना हुआ है। ऐसा ही एक वाकिया सामने आया है, जिसमे परिजनों की गुहार सुनकर सोचने पर मजबूर कर दिया…..मुझे पैसा नही चाहिए..मेरी बच्ची मुझे लौटा दो! डॉक्टर साहब फोन नही उठा रहे है? मैं घर वालो को क्या जवाब दु? नम आंखों से यह बात उन परिजनों ने की जिन्होंने बीते दिनों ही अपनी बेटी खोई थी। जिंदगी की आस में पहुँचे, परिवार की खुशी तो तभी मर गई थी।

जब उसलापुर स्थिति ओमकार हॉस्पिटल में पेट दर्द और कोविड के इलाज के लिए पहुँची 22 वर्षीय युवती की मौत हो गई। राठौर परिवार ने तब इसे नियति समझ खून का घुट पीकर सब सह लिया।मिली जानकारी के अनुसार राठौर परिवार के 22 वर्षीय बिटिया एवं उनके माता पिता जो गुजरात से अपने रिश्तेदार के घर जांजगीर जिला आये हुए थे।अचानक उनकी बेटी के पेट मे दर्द हुआ,और वे उसे पहले अपोलो लेकर आये जहां कोरोना पॉजिटिव होने से उसे उसलापुर स्थित ओमकार अस्पताल भेज दिया गया।जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गयी।

जिसके बाद वह शनिवार को डेड बॉडी लेकर अपने मूल निवास स्थान राजस्थान रवाना हुए,इस बीच जयपुर पहुँचने के बाद उन्हें पता चला कि जिस डेड बॉडी को वह अपनी बेटी का समझ दाहसंस्कार के लिए ले जा रहे है, वह उसकी है ही नही। जिसे सुन उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। इधर आनन फानन में रविवार को वह पुन बिलासपुर पहुँचे। जहाँ ओमकार हॉस्पिटल प्रबंधन ने उन्हें उनकी बेटी की डेड बॉडी देने का आश्वासन देते हुए सिम्स के मर्च्युरी बुलाया। लेकिन वहाँ भी हालत से मारे परिजनों के हाथ कुछ नही लगा। मौके पर ओमकार हॉस्पिटल के कर्मचारी परिजनों को पैसे लेकर चुप रहने मान मनौव्वल करते रहे। जिस वजह से मर्च्युरी में जमकर हंगामा भी हुआ। जिसमें परिजनों ने मिडीया के माध्यम ओमकार हॉस्पिटल के कारनामो की पोल खोलकर न्याय दिलाने की गुहार लगाई।

घण्टो चले हंगामे के बीच यह पता चला कि ओमकार हॉस्पिटल प्रबंधन के द्वारा एक नही बल्कि दो-दो मरीजो के डेड बॉडी गायब कर दी गई है। जिसकी जद में मनेन्द्रगढ़ निवासी मृतक रिटायर्ड एसईसीएल कर्मी के परिजन औऱ गुजरात के राठौर परिवार आए थे। दरसअल दोनो को अलग अलग शव थमा दिया गया। जब वे अंतिम संस्कार के दौरान शव देखे तब जाकर यह खुलासा हुआ कि यह शव उनके परिचित का नही है। वही सिम्स मर्च्युरी में उक्त मामले को लेकर घण्टो चली बहस के बाद भी डेड बॉडी का पता नही चल सका। इधर तमाम तरह के आरोप एवं प्रत्यारोप के आधार पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने भी अस्पताल का प्रमुखता से जायजा लिया।

जहां विभिन्न अव्यवस्थाएं नजर आयी,देखा गया कोरोना से मौत होने वालों का शव कहीं भी अस्त व्यस्त फैला हुआ था,और तो और यहां पिपीई किट जिसे कोरोना संक्रमितों के उपचार एवं देख रेख के दौरान उपयोग किया जाता है वो भी खुले में ही पड़ा हुआ था। वही स्थानीय पुलिस की जांच जारी है जबकि स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को ऐसे गंभीर मामलों में कार्यवाही के लिए शिकायत की दरकार है। शायद वह हर बार की तरह इस बार भी निजी अस्पतालों के कर्म कांड को देख कर अनदेखा करने की आदत से बाज नही आने वाले है। बहरहाल देखना होगा इलाज के नाम पर लोगो का खून चूस रहे ऐसे हॉस्पिटलों के ऊपर कार्यवाही की गाज कब तक गिरती है। 

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