
पैसा लेकर दो रेलकर्मी बने हुए थे इनके मुखबिर, चोरों के साथी दोनों रेल कर्मियों पर रेलवे है मेहरबान ,उनके खिलाफ नहीं हुई कोई कार्यवाही
बिलासपुर आलोक अग्रवाल
पुरानी कहावत है चोर ,चोरी से जाए मगर हेरा फेरी से न जाए। तो वही एक और कहावत है कि बंदर कितना भी बूढ़ा हो जाए गुलाटी मारना नहीं छोड़ता। ऐसा ही कुछ बिलासपुर के शातिर अपराधी मुल्तान के बारे में भी कहा जा सकता है। तार बहार इलाके में तेल डिपो की मौजूदगी के दौरान मुल्तान ने बरसों तक तेल चोरी किया। न जाने इसके लिए वह कितनी बार जेल गया। लेकिन उसका कारोबार तभी थमा ,जब तार बाहर से तेल डिपो हटा। बहुत लोगों ने सोचा कि इससे मुल्तान ने तेल चोरी के धंधे को बंद कर दिया। लेकिन यह लोगों की गलतफहमी थी। बूढ़ाते मुल्तान के बेटे शेख असलम उर्फ बाबू ने अब उसके धंधे को संभाल लिया है और उसने बाकायदा अपने ही जैसे कुछ छंटे हुए बदमाशों को मिलाकर एक गिरोह भी बना लिया है। इस गिरोह के अधिकांश सदस्य मुस्लिम और ईसाई लड़के हैं। यह गेम अब उसलापुर क्षेत्र में सक्रिय है और यह तेल चोर इसलिए भी कामयाब हो रहे हैं क्योंकि रेलवे के भीतर ही कुछ जयचंद मौजूद है। इन गद्दार रेल कर्मियों की वजह से ही इन तेल चोर गिरोह का धंधा फल-फूल रहा था।
पिछले काफी समय से उसलापुर के पास से रैक से तेल चोरी की घटना घट रही थी। आरपीएफ भी इससे परेशान थी। इसी दौरान उसलापुर आरपीएफ चौकी के उप निरीक्षक विरेंद्र कुमार को सूचना मिली कि कुख्यात शेख असलम अपने एक साथी के साथ इस काम में जुटा हुआ है । जिसके बाद एक टीम को उसकी निगरानी के लिए रवाना किया गया। यह टीम व्यापार विहार होटल आनंदा के सामने खाली मैदान में निगरानी करने लगी।इस दौरान उन्होंने पाया कि एक पुरानी साइकिल में एक जरीकेन लेकर दो युवक आ रहे हैं। उन्हें देखकर आरपीएफ की टीम ने दोनों को धर दबोचा। इसमें से एक कुख्यात तेल चोर मुल्तान का बेटा शेख असलम उर्फ बाबू था ,तो वहीं उसका दूसरा साथी कपिल नगर सरकंडा में रहने वाला चिराग कश्यप निकला । इन दोनों के पास मौजूद जरीकेन से 15 लीटर डीजल बरामद हुआ । लेकिन असली कहानी तो अभी बाकी थी। जब आरपीएफ ने इनसे कड़ाई से पूछताछ की तो इन्होंने कई महत्वपूर्ण राज उगले। शेख असलम ने बताया कि उसके गिरोह में ए एविएल पीटर, वसीम , बिलाल अंसारी , एमानेल पीटर,जैनिल मसीह , मोहम्मद इस्लाम सोना सोनवानी, चिराग कश्यप जैसे छंटे हुए बदमाश शामिल है। यह सभी लंबे वक्त से उसलापुर से तेल चोरी किया करते थे। उन्होंने बताया कि 11-12 मार्च की रात भी यह लोग तेल चोरी के इरादे से उसलापुर पहुंचे थे। लेकिन उस दिन कुछ सुरक्षाकर्मियों के आ जाने से इन्हें भागना पड़ा । लेकिन इसी दौरान इनका एक साथी एवीयल पीटर उर्फ रिंकू पकड़ा गया। साथ ही 40 जैरिकेन डीजल भी पकड़ा गया था ,लेकिन इस से ही भी गिरोह की हिम्मत पस्त नहीं हुई और एक बार फिर 23 मार्च की रात इमानुएल पीटर किराए पर एक टाटा मैजिक ले आया। टाटा मैजिक क्रमांक सीजी 10 एफ ए 8615 में सवार होकर यह सभी उसलापुर पहुंचे ।जहां वसीम और असलम निगरानी करने लगे और फिर इस गैंग के चोरों ने बड़ी मात्रा में तेल की चोरी की।
असल में यह चोर इसलिए कामयाब हो रहे थे क्योंकि रेलवे के भीतर ही कुछ गद्दार शामिल थे। रेलवे के कंट्रोल में काम करने वाला स्वराज नाग चौधरी, सचमुच वह नाग निकला जिसके आगे आस्तीन का सांप भी फीका पड़ जाए। रेलवे में नौकरी करते हुए रेलवे से हर सुविधा हासिल करने वाला यह लालची रेलकर्मी अपने ही विभाग को धोखा दे रहा था।
स्वराज नाक चौधरी इन तेल चोर गिरोह को तेल गाड़ी आने की सूचना फोन पर देता था और इसके एवज में प्रति रैक वह इन लोगों से 10 हज़ार रुपये वसूलता था। स्वराज नाथ चौधरी के अलावा एक और रेल कर्मचारी डेनियल विलियम उर्फ़ दानू विलियम भी तेल चोर गिरोह का साथी था। तिफरा ब्रिज के केबिन में प्वाइंट सेटिंग का काम करने की वजह से गाड़ी आने पर सिग्नल की जानकारी उसे होती थी। जिसे वह इस गिरोह को उपलब्ध कराता था। रेलकर्मी होने की वजह से वह आरपीएफ के हर कर्मचारी को पहचानता भी था, इसलिए आरपीएफ के आने की सूचना भी वह इन्हें देता रहा। जिसके बदले में उसे भी यह लोग प्रति रैक 5000 रुपये दिया करते थे। रेलवे के रैक से डीजल चोरी कर यह गिरोह, व्यापार विहार में आने वाले ट्रक चालकों को बाजार मूल्य से कम मूल्य पर इन्हें बेचकर मुनाफा कमा रहा था। यानी रेलवे का डीजल और बेच ये ऐसे रहे थे जैसे इन्होंने डीलरशिप ली हो। जिसमें रेलकर्मी स्वराज नाग चौधरी और डेनियल विलियम अपने ही विभाग को चुना लगा कर मोटी रकम कमा रहे थे। आरपीएफ ने इस मामले में मुल्तान के बेटे शेख असलम और चिराग कश्यप को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं इनके अन्य फरार साथियों की तलाश कर रही है ।वैसे यह लोग तो आदतन चोर हैं और इनका पूरा खानदान इसी पेशे में लगा हुआ है, लेकिन रेलवे को असली कार्यवाही तो अपने उन गद्दार कर्मचारियों पर करनी चाहिए जिन्होंने अपने ही विभाग से गद्दारी कर विभाग का मुंह काला किया है। ऐसे चोरों के साथी को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए, ताकि अन्य रेलकर्मी भी इससे सबक लें और विभाग से गद्दारी करने से पहले सौ बार सोचे। बेईमानी की कमाई करने वाला, स्वराज नाग चौधरी आलीशान जिंदगी जीने का आदि है । वह कार में चलता है। शहर में उसके कई फ्लैट्स और अचल संपत्तियां मौजूद है। ऐसा उसने चंद सालों की नौकरी में ही कैसे जुटाया, यह जांच अब रेलवे के साथ इनकम टैक्स विभाग को भी करना चाहिए। ताकि तालाब को गंदा करने वाले इस मछली की सच्चाई सबको पता लग सके।