
खुद प्रकृति ने आपके लिए होली खेलने का साधन उपलब्ध कराया है,
बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
इन दिनों हर तरफ आयुर्वेदिक का जोर है। बड़ी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां जो पहले आयुर्वेदिक के नाम पर व्यंग किया करती थी,अब आयुर्वेदिक और प्राकृतिक वस्तुओं के पीछे भाग रही है। ऐसे में अगर होली के लिए भी हर्बल कलर का प्रयोग होने लगा है तो हैरान नहीं होना चाहिए । सुरक्षित होली मनाने के लिए लोग हर्बल कलर को प्राथमिकता दे रहे हैं । लेकिन असली हर्बल कलर तो खुद होली के लिए कुदरत ने उपलब्ध कराया है। इन दिनों शहर के बाहर निकलने पर हर तरफ लाल लाल फूलों से लदे पलाश के पेड़ नजर आ जाते हैं। दूर-दूर तक छाई लालिमा से ऐसे लगता है जैसे जंगल में आग लगी हुई है । लाल चटक रंग बरबस अपनी ओर खींचते है। यह बड़ा ही दुर्लभ संयोग है कि ठीक होली पर्व के आसपास ही पलाश के इन पेड़ों में खूबसूरत फूलों के गुच्छे खिल उठते हैं ।कहां जाता है कि शुरुआती दिनों में लोग इन्हीं फूलों के रंग से होली खेला करते थे । भारत के सभी हिस्सों में पाए जाने वाले इस खूबसूरत फूलों वाले पेड़ को परसा , ढाक, टेसू और केसु भी कहा जाता है ।इसके फूल बेहद आकर्षक नजर आते हैं ।पलाश के इन फूलों का रस इन दिनों जंगल में पक्षी बड़े चाव से पी रहे हैं तो वही आसपास के ग्रामीण इन फूलों को इकट्ठा कर रहे हैं ।असल में गर्म पानी के साथ उबालने पर यह फूल एक बहुत ही अच्छा सा पीला और नारंगी रंग देते हैं जिससे लोग होली खेलते हैं। इसके फूलों को सुखाकर बनाए गए पाउडर का इस्तेमाल गुलाल की तरह भी किया जाता है ।आजकल जो बाजार में हर्बल कलर मिलते हैं उनमें से अधिकांश में पलाश के फूलों का ही प्रयोग होता है। वैसे प्राकृतिक होने की वजह से पलाश के फूलों में भी औषधि गुण है ।अव्वल तो इसके इस्तेमाल के बाद त्वचा को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता उल्टे इसके प्रयोग से चेहरे में चमक बढ़ती है कृमि नाशक होने से सभी त्वचा रोगों में भी इसका लाभ मिलता है
पलाश के फूल के पानी का प्रयोग तो लोग चर्म रोग दूर करने के लिए सदियों से करते आ रहे हैं। पलाश का रंग खूबसूरत और हानि रहित होने के साथ शीतल भी होता है। जो गर्मी के दिनों में इस्तेमाल करने वालों को सुखद एहसास कराता है। अगर आप होली खेलने के शौकीन हैं तो जाहिर तौर पर रंगो के भी शौकीन होंगे, लेकिन आपके द्वारा लगाएं रंगो से अगर किसी को नुकसान होता है तो इससे आपको खुशी तो नहीं मिलेगी। इसलिए बेहतर होगा कि हम प्रकृति की ओर लौटे और इसके लिए होली के इस अवसर से बेहतर और क्या होगा, जब आप भी टेसू के इन फूलों से होली मना सकते हैं। मजे की बात यह है कि यह फूल आपको बिल्कुल मुफ्त मिल सकते हैं ।अगर आपका शहर के बाहर आना जाना है तो आपको जंगल में बहुतायत में टेसू के पेड़ नजर आएंगे जहां आप बिल्कुल मुफ्त इन फूलों को तोड़ कर अपने साथ ले जा सकते हैं। चाहे तो इन्हें उबालकर रंग तैयार कर ले या फिर सुखाकर अबीर। इस होली यह संकल्प करें की हमेशा होली आप टेसू के इन फूलों से ही खेलेंगे। खुद प्रकृति ने आपके लिए होली खेलने का साधन उपलब्ध कराया है, फिर क्या जरूरत है बाजार के महंगे और नुकसानदायक केमिकल वाले रंग खरीदने की। टेसू के फूलों से होली खेल कर आप भी खुश और जिनके साथ आप होली खेलेंगे वे भी खुश। है ना दोहरा लाभ।