
कानून व्यवस्था और थाने का काम भी सुचारू चलता रहे इसलिए कुछ पुलिस कर्मी रोज की तरह अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद भी नजर आए
बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
होली दिवाली या कोई और त्यौहार हो, जब पूरा देश उतसव के उत्साह में डुबा होता है तब भी सीमा पर वर्दी धारी सैनिक और सीमा के भीतर वर्दी पहने पुलिस के जवान अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद होते हैं। आम आदमी बे खटके, बिना किसी चिंता के अपना उत्सव मना सके इसके लिए पुलिस के जवान अपने घर परिवार से दूर सिर्फ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। वैसे तो खाकी पर कोई दूसरा रंग आसानी से चढ़ता नहीं, लेकिन वर्दी के साथ बेरंग सी होती ज़िंदगीओं को भी कभी-कभी मस्ती में डूबे जश्न मनाते देखना सुखद एहसास कराता है। अब तो ऐसी परंपरा बस सी बन चुकी है की पुलिस के जवान और अधिकारी होली के अगले दिन होली मनाते हैं। पुलिस वालों की होली हमेशा से खास हुआ करती है। पूरे देश में जहां गुरुवार को होली मनाई तो वही पुलिस विभाग के कर्मचारियों ने 1 दिन देर से यानी शुक्रवार को होली का पर्व मनाया । यहां देर आए दुरुस्त आए वाली कहावत चरितार्थ होती नजर आई। नजारा चाहे सिविल लाइन थाने का हो ,कोतवाली या फिर किसी और थाने का। सभी जगह कुछ देर के लिए जिम्मेदारियों की गठरी एक और रख पुलिस के जवान होली की मस्ती में डूब गए। जब रंग और गुलाल चेहरों पर लगा तो फिर सारे दीवार ढहते चले गए
भेदभाव मिटाकर सबने एक दूसरे को जी भर कर रंगा और डीजे के साथ जमकर थिरके
थाना में पुरुष कर्मचारियों के साथ महिलाओं ने भी जमकर होली मनाई।
महिला थाने के भी नजारे शुक्रवार को अलग नहीं थे यहां भी ठंडाई के साथ रंग सब पर चढ़ा नजर आया। एक दूसरे को रंगने, बधाई देने और साथ साथ नाचते झूमते होली मनाने के नजारे ने सबको आनंद से भर दिया।
आमतौर पर अनुशासन में ढले, कड़क पुलिस की छवि से अलग शुक्रवार को पुलिस के जवानों की होली मस्ती भरी थी। काम के दौरान उपजे साल भर के तनाव को शायद इन लोगों ने कुछ ही घंटों में उतार फेंका । पुलिस के साथ पत्रकारों ने भी इस होली में शामिल होकर उन्हें बधाई दी और उनके जश्न का हिस्सा बने। ऐसा नहीं है कि अपनी जिम्मेदारी भूलकर सभी पुलिसकर्मी होली की मस्ती में खो गए हो। कानून व्यवस्था और थाने का काम भी सुचारू चलता रहे इसलिए कुछ पुलिस कर्मी रोज की तरह अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद भी नजर आए ।