
सुग्घर बिलासपुर बनने की जगह बिलासपुर मच्छर पुर बन कर रह जाएगा, ऐसा किसने सोचा होगा ,लेकिन आज यही हकीकत है
बिलासपुर उदय सिंह
सीवरेज से लोग इस कदर परेशान हुए कि शहर का नाम ही बिलासपुर से बदलकर खोदापुर रख दिया। सत्ता में बैठे लोगों को यह मजाक लगा।मगर इस मुद्दे को विपक्ष ने इतनी दमदारी से उठाया कि अंगद के पांव की तरह जमे अमर अग्रवाल भी उखड़ गए। लेकिन चंद महीनों में ही शहर एक ऐसे दूसरे आफत में घिर गया है कि लोगों ने फिर से बिलासपुर का नाम बदलने का इरादा कर लिया है ।बिलासपुर को अब लोग मच्छर पुर कहने लगे हैं। और ऐसा यूं ही नहीं कहा जा रहा। पिछले करीब एक सप्ताह से लोगों ने बिलासपुर के सभी इलाकों में इतनी बड़ी तादाद में मच्छरों का सामना किया है, जितना उन्होंने पूरी जिंदगी कभी नहीं किया। ऐसा 20 साल के जवान ही नहीं बल्कि 70 -80 साल के बुजुर्ग भी कह रहे हैं कि उन्होंने पूरी जिंदगी में बिलासपुर में इतना मच्छर कभी नहीं देखा ।आखिर ऐसा क्या हो गया कि अचानक बिलासपुर पर किसी हॉलीवुड फिल्म की तरह मच्छरों ने धावा बोल दिया।
जानकारों की माने तो इसके पीछे एक नहीं कई वजहे गिनाई जा रही है। कहते हैं कि अरपा का पानी चेक डैम में रोक दिया गया है, जिस वजह से अरपा का गंदा पानी मच्छरों का प्रजनन केंद्र बन चुका है। और वहीं से बड़ी तादाद में मच्छर शहर में पहुंच रहे हैं, तो वहीं एक दूसरा तर्क यह भी दिया जा रहा है कि बरसों से सीवरेज के खाली पाइप लाइनों में मच्छरों ने ठिकाना बना लिया था और वहां उनकी आबादी बेहिसाब बढ़ी। हाल ही में सीवरेज पाइप लाइन का हाइड्रोलिक टेस्ट किया गया, जिस दौरान सभी मच्छर बाहर आ गए और इसी वजह से मच्छरों की संख्या बेहिसाब बढ़ गई ,तो वही एक वर्ग यह भी कह रहा है कि जब से बिलासपुर में हमर बिलासपुर ,सुग्घर बिलासपुर योजना शुरू की गई तभी से मच्छरों का हमला बढ़ा है । वैसे तो योजना में बिलासपुर के वार्डों की सफाई की गई। जिन नालों की सफाई कभी नहीं होती थी उनकी भी सफाई हुई ।मलबे के ढेर लगे थे ,उन्हें भी उठाया गया ।लोगों का मानना है कि बरसों से जमी नालियों में मच्छरों ने घर बनाया हुआ था, यकायक उनकी सफाई से सभी मच्छर उड़कर बाहर आ गए और इन्हीं मच्छरों की वजह से लोगों की रात की नींद और दिन का चैन हराम हो चुका है ।घरों में एक पल बैठा नहीं जा रहा। महिलाएं न तो खाना बना पा रही है और ना ही चैन से बैठकर कोई भोजन कर पा रहा है। टीवी देखने के दौरान लोग मच्छरों के काटे जाने से खुजला खुजला कर अपना शरीर लहूलुहान कर रहे हैं ।घर में मेहमान आते हैं तो उनका भी यही हाल होता है ,इसलिए मेहमान भी खरी खोटी सुना कर वापस लौट जाते हैं। टॉयलेट तक जाना लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन चुका है। टॉयलेट में मच्छर इस तरह से घेर लेते हैं की दैन्यदिनी काम करना भी मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में मुश्किल ये भी है कि शिकायत किससे करें ।महापौर किसी की सुनते नहीं। चुनिंदा जगहों पर फागिंग की जाती है। जिसका भी कोई प्रभाव नहीं निकलता। पता नहीं कैसी दोयम दर्जे की दवाइयां इस्तेमाल की जा रही है जिससे मच्छरों पर कोई असर नहीं होता । बिलासपुर में पूर्व विधायक अमर अग्रवाल की हर गलती को पुरजोर तरीके से उठाकर जनता की आवाज बनने वाले विधायक शैलेश पांडे की छवि सहज सुलभ व्यक्ति की थी ,लेकिन विधायक बनते ही वे भी दुर्लभ हो गए। पहले तो वे हर किसी का फोन रिसीव कर लिया करते थे, पर अब उनसे बात करना आसान नहीं रह गया है ।उन्हें फोन लगाने पर कोई और फोन उठाता है और बात कराने का झूठा आश्वासन देकर टाल दिया जाता है। लोग ना तो विधायक से कुछ कह पा रहे हैं ना महापौर से और ना ही अन्य जनप्रतिनिधियों से ।
कोई सुनने वाला नहीं है । किसी से शिकायत करें तो जिम्मेदार इसे मजाक बना कर टाल देते हैं ,लेकिन जब रात में कोई सोता है और उसके कान के आस पास आकर मच्छर भिनभिनाते हैं और यहां वहां काटते हैं तो उस वक्त उसके मन में क्या गुजरती है यह वही जानता है। क्योंकि यह मजाक का मुद्दा तो उसके लिए कतई नहीं है । सुग्घर बिलासपुर बनने की जगह बिलासपुर मच्छर पुर बन कर रह जाएगा, ऐसा किसने सोचा होगा ,लेकिन आज यही हकीकत है । मच्छरों के मारने के लिए बाजार में उपलब्ध अगरबत्ती, क्वाइल लिक्विड, क्रीम पर करोड़ों का खर्चा शहरवासी कर रहे हैं ,लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं मच्छरदानी भी बेअसर साबित हो रहे हैं। घरों में नेट लगे है तो भी मच्छर कहीं ना कहीं से घुस ही जा रहे हैं। असल में इतनी बड़ी तादाद को रोकना आसान नहीं है। आम आदमी इस आपदा से नहीं निपट सकता ।इसके लिए तो सरकार को ही बड़े पैमाने पर कुछ करना होगा। सबसे पहले यह जानना होगा कि अचानक से बिलासपुर में इतने मच्छर कहां से और कैसे आ गए ? क्योंकि वजह को जाने बगैर इलाज मुमकिन नहीं, लेकिन अगर जल्द ही यह नहीं किया गया तो फिर बिलासपुर ,मच्छर पुर कहलाने लगेगा और अगला चुनाव शायद इसी मुद्दे पर लड़ा जाए। बात बात पर अमर अग्रवाल की खबर लेने वाले, अब कहां चले गए यह जनता जानना चाह रही है ?