छत्तीसगढ़बिलासपुर

यंग जनरेशन का प्यार- हुक्का बार, लेकिन अब कार्यवाही की मार से बंद हो रहे हुक्का बार

जड़ से समाप्त करने के लिए किसी बड़े ऑपरेशन की जरूरत है ,तभी नई पीढ़ी की जिंदगी धुआं धुआं होने से बचाया जा सकेगा

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य

इन दिनों शहर में एक अजीब सा चलन चल पड़ा है । नई पीढ़ी मौज मस्ती के नाम पर अपनी जिंदगी में तंबाकू का जहर घोल रही है। जिंदगी धुआं धुआं हुआ जा रहा है। फैशन परस्ती और मॉडर्न कल्चर के नाम पर शहर में एक के बाद एक कुकुरमुत्ते की तरह खुले हुक्का बार शहर के रईसजादो और छात्र-छात्राओं की जिंदगी बर्बाद कर रही है। बिलासपुर में इसी वर्ग को ध्यान में रखकर कॉलेज के आसपास और व्यापार विहार जैसे वीरान क्षेत्रों में कई हुक्का बार खुल चुके हैं ,जहां फ्लेवर हुक्का के नाम पर तंबाकू का जहर युवा पीढ़ी के खून में घोला जा रहा है। महानगरो से प्रेरित नई पीढ़ी इसे स्टेटस सिंबल मानती है, इसीलिए यहां शाम से लेकर आधी रात तक युवक-युवतियों की भीड़ धुएं के छल्ले उड़ाते नजर आती है । नई पीढ़ी के बर्बाद होने की शिकायत बार-बार मिलने के बाद बिलासपुर के विधायक शैलेश पांडे ने भी मामले को गंभीरता से लिया था। शिक्षाविद होने के नाते वे छात्र-छात्राओं को बर्बाद होते नहीं देखना चाहते ,उन्हीं के निर्देश के बाद बिलासपुर में लगातार अवैध रूप से चल रहे हुक्का बार पर कार्यवाही की जा रही है । कुछ दिनों पहले भी व्यापार विहार में इसी तरह की कार्रवाई हुई थी, वहीं शुक्रवार को एक बार फिर डीपी कॉलेज के पास स्थित मूछ वाला और सीएमडी कॉलेज के पास मौजूद ब्लैक जैक हुक्का बार में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने रेड किया ।पुलिस, आबकारी विभाग और खाद्य विभाग अब ऐसे हुक्का बार पर शिकंजा तेज कर रही है । हैरानी इस बात की है कि किसी भी हुक्का बार को लाइसेंस नहीं दिया गया है।

सभी हुक्का बार रेस्टोरेंट के लाइसेंस से ही संचालित हो रहे हैं। जिसके तहत निकोटिन प्रोडक्ट का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। बावजूद इसके कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है। फ्लेवर हुक्का के नाम पर तंबाकू पदार्थ परोसे जा रहे हैं। नई पीढ़ी को धुए की लत लग चुकी है। शुक्रवार को जब छापामार टीम ब्लैक्जैक पहुंची तो उस वक्त दर्जनों युवकों के साथ 12 से अधिक युवतियां भी धुएं का छल्ला उड़ाती मिली। इन्हीं हुक्का बारों की वजह से शहर में लड़कियों में स्मोकिंग का कल्चर बढ़ता जा रहा है। आजकल बिलासपुर में भी लड़कियों को सरेआम धूम्रपान करते देखना आम बात है। शुक्रवार को टीम मूछ वाला पहुंची तो दिखा कि कई युवक -युवती वहां हुक्के का धुआं उड़ा रहे हैं। रेड की खबर लगते ही उन में हड़कंप मच गया। रेस्टोरेंट संचालक से जब लाइसेंस मांगा गया तो उन्होंने रेस्टोरेंट संचालन का लाइसेंस पेश कर दिया, लेकिन रेस्टोरेंट के लाइसेंस से तंबाकू पदार्थों की बिक्री नहीं की जा सकती। इसलिए कार्रवाई करते हुए मूछ वाला और ब्लैक्जैक हुक्का बार को सील कर दिया गया ।
सोशल मीडिया के इस जमाने में अच्छाई और बुराई सभी चीजें तेजी से फैलती है । बड़े शहरों में धड़ल्ले से चल रहे हुक्का बार का कल्चर धीरे-धीरे बिलासपुर में भी फैल रहा है और नई पीढ़ी इसके जाल में फंसती जा रही है । नव धनाढ्य वर्ग के पास बेहिसाब पैसा है और बच्चों के लिए जरा भी वक्त नहीं। वक्त ना देने की भरपाई वे उन्हें भारी भरकम जेब खर्च देकर पूरा करते हैं , और जेब में पड़ा फिजूल का पैसा ऐसी ही बुरी आदतों को दावत देता है। लड़कियों को इंप्रेस करने लड़के ऐसी जगहों पर उन्हें डेट पर ले जाते हैं। इस वजह से हुक्का बार चलाना भारी मुनाफे का कारोबार बन चुका है। सूत्रों की माने तो हुक्का बार की आड़ में देह व्यापार और अन्य काले कारनामे अंजाम दिए जा रहे हैं। और नई पीढ़ी इसके जाल में फसती जा रही है । विभाग ने पिछले दिनों भी ऐसे हुक्का बारों पर नकेल कसने की कोशिश की थी और आगे भी कार्रवाई की बात कह रही है ।

लेकिन पिछला अनुभव यही बताता है कि हुक्का बार सील होने के बावजूद 1 या 2 दिनों में बार का ताला वापस खुल जाता है और यह काला कारोबार धड़ल्ले से चलने लगता है। इस तरह की आधी अधूरी कार्रवाई से मुहिम की कामयाबी हमेशा संदिग्ध रहेगी। इसलिए इसे जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए पुख्ता कार्यवाही करनी होगी। जिन भवनों में हुक्का बार संचालित हो रहे हैं, उन पर ही ताला जड़ दिया जाए। हुक्का बार चलाने वालों को सलाखों के पीछे भेजा जाए । इतना ही नहीं जो भी युवक-युवती हुक्का बार में पाए जाए उनकी पहचान सार्वजनिक करते हुए उनकी परेड उनके अभिभावकों और समाज के सामने कराई जाए, तभी मुकम्मल रोक मुमकिन होगी ।नहीं तो एक-दो हुक्का बार बंद कराने से मकसद हासिल होने से रहा। फिलहाल दो हुक्का बार पर कार्रवाई के बाद निकोटीन प्रोडक्ट और फूड मैटेरियल का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है, जिसके रिपोर्ट आने के बाद बड़ी कार्रवाई की बात कही जा रही है । इधर इस कार्यवाही से बार संचालकों में हड़कंप नजर आया, लेकिन इस कारोबार में मुनाफा अधिक होने की वजह से अधिकांश वे लोग इस धंधे में उतर आए हैं, जिनका अपराधिक बैकग्राउंड है। इसलिए इस तरह की छोटी मोटी कार्यवाही से उन पर खास असर पड़ने वाला नहीं है। इसे जड़ से समाप्त करने के लिए किसी बड़े ऑपरेशन की जरूरत है ,तभी नई पीढ़ी की जिंदगी धुआं धुआं होने से बचाया जा सकेगा।

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