
सफाई कर्मचारी कबाड़ी को बेच कर अपनी जेब गर्म कर रहे हैं । अपने वेतन से अधिक तो वे इसी तरह कमाई कर शासन को चूना लगा रहे हैं
बिलासपुर आलोक अग्रवाल
स्वच्छ भारत अभियान के तहत बिलासपुर में भी डोर टू डोर कचरा कलेक्शन किया जाता है। पूरे शहर में सुबह से ही निकली गाड़ियां हर घर से सूखा और गीला कचरा इकट्ठा करती है। जिसका निष्पादन कछार स्थित प्लांट में किया जाता है। इसका ठेका एमएसडब्ल्यू सलूशन लिमिटेड दिल्ली को दिया गया है, यानी इस कचरे पर पूरा हक इस कंपनी का है। लेकिन उनके हक पर सफाई कर्मचारी डाका डाल रहे हैं। सुबह सुबह कचरा कलेक्शन के लिए पहुंचने वाले इन कर्मचारियों को वेतन के तौर पर 8000 रुपये प्रतिमाह दिया जाता है, लेकिन कर्मचारी कचरे पर भी डाका डाल रहे हैं। दरअसल घरों से जो कचरा कलेक्ट किया जाता है उसमें कबाड़ भी शामिल होता है। आमतौर पर बोतल, धातु की सामग्री, कागज रद्दी पेपर जैसी कई चीजें कबाड़ में शामिल होती है ।कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि वे सूखा और गीला कचरा अलग अलग एमएसडब्ल्यू सॉल्यूशन को प्रदान करें लेकिन ऐसा करने से पहले यह लोग अपनी जेब भरने का प्रबंध कर लेते हैं। कचरा कलेक्शन के बाद सभी गाड़ियां तालापारा और श्रीकांत वर्मा मार्ग स्थित कबडियो की दुकान पहुंच जाते है ,जहां कर्मचारी छांट छांट कर बेचे जाने वाले वाली सामग्रियों को अलग करते हैं और इन्हें कबाड़ीओ को बेच दिया जाता है। लोकल कबाड़ीओ को सबसे अधिक सामग्री आजकल कचरा कलेक्ट करने वाले कर्मचारी ही उपलब्ध करा रहे हैं। यह कर्मचारी प्रतिदिन 200 से लेकर 300 रुपये तक अतिरिक्त इस तरह से कमा लेते हैं। यानी कि इन्हें जितनी तनख्वाह मूल कार्य के लिए दी जाती है उससे कहीं अधिक तो यह लोग कबाड़ बेचकर कमा रहे हैं ।
किसी भी दिन दोपहर बाद आप कचरा गाड़ियों को तालापारा की सड़क और गलियों में कबाड़ दुकान के सामने घंटों खड़ा देख सकते हैं ।ऐसा लगता है जैसे यह यह जगह स्टॉपेज पॉइंट है ,लेकिन ऐसा है नहीं ।सफाई कर्मचारी और कबाड़ खरीदने वालों के बीच सांठगांठ कर उस कचरे से पैसा कमाया जा रहा है जिस पर नियमानुसार हक एमएसडब्ल्यू सोल्यूशन लिमिटेड का है ,जिनके द्वारा कचरे से बिजली ,खाद आदि बनाने की योजना ,है लेकिन जिस तरह से सफाई कर्मचारी कचरे से निकाल कर कबाड़ बेच रहे हैं जाहिर है, उनके पास आधा कचरा ही पहुंच पाता है। यह सब कुछ नगर निगम की नाक के नीचे खुलेआम किया जा रहा है लेकिन इस पर कभी कोई कार्यवाही नहीं होती जिस वजह से कर्मचारी यह अवैध काम डंके की चोट पर कर रहे हैं ।