बिलासपुर

कोरोना के कहर से आशंकित बैंकर्स, मुख्यमंत्री से पुनः लॉक डाउन पर विचार करने की मांग करते हुए दिए गए सुझाव….संक्रमण का दायरा हो रहा विस्तृत

रमेश राजपूत

बिलासपुर– देश व प्रदेश के साथ बिलासपुर में कोरोना पॉजिटिव के लगातार बढ़ने से सबसे से ज्यादा चिंतित बैंकर्स हो रहे हैं। लॉक डाउन के दौरान जब सबकुछ बंद था तब भी बैंकर्स अपने घर परिवार की चिंता किये बिना अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने नियमित सेवा दे रहे थे। लेकिन अनलॉक के बाद बैंकों में भीड़ बढ़ते जा रही हैं। हालांकि बैंक अपने स्तर पर शाखाओं को नियमित सेनेटाइज करवा रहे हैं। आने वाले ग्राहकों हेतु हाथ धोने हेतु पानी व लिक्विड सोप, सेनेटाइजर, थर्मल स्क्रेनिंग की व्यवस्था, जिनके पास मास्क नही हैं, उन्हें मास्क उपलब्ध करवाते हुए सोशल डिस्टेंस का पालन करने का आग्रह करते रहते है। लेकिन बैंको में नियमित ग्राहकों के अलावा कोर बैंकिंग में अन्य शहरों के खातों में राशि जमा करने, बेयरर चैक का आहरण करने, अन्य की पासबुक में इंट्री करवाने वाले आदि लगभग 150 से 200 व्यक्ति शाखा में आते जाते रहते हैं। ऐसे में प्रत्येक से पूछताछ करना संभव नहीं हो पाता हैं। यही कारण हैं कि विगत 30 जून व 3 जुलाई को स्थानीय बैंको में गए एक व्यक्ति को जब ज्ञात हुआ कि वे कोरोना पाजिटिव हैं तो उन्होंने बैंक को सूचना दी।  6 जुलाई को उस बैंक के सभी स्टॉफ की जांच करने पर 8 जुलाई को चार स्टॉफ कोरोना पॉजिटिव पाए जाने से कोविड 19 अस्पताल ले जाए गए। अभी पर्याप्त जांच नही होने से कौन पॉजिटिव हैं, यह तय करना मुश्किल है।

यदि समय रहते उचित उपाय नही किये गए तो सारे बैंकर्स के भी संक्रमित होने की आशंका से छत्तीसगढ़ के बैंकर्स ने स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी व माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन किया हैं कि कर्नाटक, असम, बिहार की तरह छत्तीसगढ़ में भी शुक्रवार शाम 7 बजे से सोमवार सुबह 7 बजे तक सम्पूर्ण लॉक डाउन रखते हुए सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक ही बैंक खोलने, 50% स्टॉफ में कार्य सम्पादित करवाने, बैंकर्स की कोरोना जांच करवाने तथा संक्रमित होने पर उचित ईलाज करवाने की उचित व्यवस्था की जाए। आम जनता से भी विनम्र आग्रह किया जाता हैं कि अतिआवश्यक होने पर ही बैंक जाए अन्यथा सुरक्षित रूप से ऑन लाइन बैंकिग का इस्तेमाल कर स्वयं को सुरक्षित रखें। बैंकर्स के साथ एक दुःखद पहलू यह भी हैं कि कुछ बैंकर्स अकेले रहते हैं। यदि वे कोविड 19 अस्पताल से डिस्चार्ज होकर वापस घर जाते हैं तो उनके मकान मालिक उन्हें घर मे नही आने देते। मजबूरी में होटल में ही कोरेन्टीन होना पड़ता हैं। समाज को यह समझना होगा कि बैंकर्स भी कोरोना वरिर्यस ही हैं। अभी तक देश मे 50 से ज्यादा बैंकर्स कोविड में शहीद हो गए हैं। यदि उन्हें सम्मान नही दे सकते तो कम से कम अपमान तो ना करे। वे देश, समाज की सेवा करते हुए ही संक्रमित हुए थे। कृपया जिला प्रशासन के निर्देशों का अनुपालन करे। स्वयं भी सुरक्षित रहें, दूसरों को सुरक्षित रहने में सहयोग करे।

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