
उदय सिंह
बिलासपुर – जिले के मस्तूरी विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लोहर्सी (सोन) से सामने आई घटना ने समाज में शिक्षक की भूमिका पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। जहां शिक्षक को समाज का निर्माता और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है, वहीं इसी स्कूल के व्याख्याता सानुज राम सोनी पर अपने ही संस्था प्रमुख को पूरे स्टाफ के सामने अपशब्द कहने और धमकाने का आरोप लगा है। मामले की लिखित शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी से की गई है। जिसमे बताया गया है कि गुरुवार को सुबह 10:30 बजे प्रार्थना के बाद पूरे स्टाफ के सामने व्याख्याता सानुज राम सोनी ने प्राचार्य को अपशब्द कहते हुए उपस्थिति को लेकर धमकाया और कहा – “बार-बार देख लूंगा, तू मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता, मैं तुम्हें प्राचार्य नहीं मानता।”
पत्र में यह भी आरोप है कि उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर के बाद पुरानी सीएल (CL) के बदले गुरुवार की छुट्टी की मांग की और गुरुवार की सीएल (CL) को न लिखने का दबाव बनाया। इसी दौरान बीच-बचाव करने पर अन्य स्टाफ को भी धमकी दी गई। फिलहाल प्राचार्य ने इस मामले में डीईओ बिलासपुर, बीईओ मस्तूरी और थाना पचपेड़ी को लिखित शिकायत देकर उचित कार्रवाई की मांग की है। जिसको आगामी दिनों में होने वाली कार्यवाही में सभी की निगाहें टिकी हुई है।
क्यों बिगड़ रहा है माहौल? – बीईओ की भूमिका पर सवाल

सूत्रों की माने तो ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी का स्कूलों में उचित दखल और नियमित मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण ही ऐसे विवाद जन्म ले रहे हैं। यदि समय पर उच्च कार्यालय द्वारा अनुशासनहीनता पर कार्रवाई की जाती, तो आज एक प्राचार्य को अपनी सुरक्षा के लिए डीईओ और थाने तक पत्र लिखने की नौबत नहीं आती। मिली जानकारी के अनुसार घटना के दिन संकुल समन्वयक द्वारा घटना का वीडियो बनाए जाने पर उनका कॉलर पकड़कर “गांव वाले हो, देख लूंगा” कहना, यह दर्शाता है कि स्कूल में प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह कमजोर हो चुका है। प्राचार्य ने पत्र में भविष्य में शारीरिक हादसे की आशंका भी जताई है। शिक्षा विभाग के जानकारों का मानना है कि जब ब्लॉक शिक्षा अधिकारी का स्कूलों में भय और सम्मान दोनों खत्म हो जाए, तो शिक्षक ही शिक्षक को धमकाने लगता है, जिसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा और स्कूल के माहौल पर पड़ता है।