
उदय सिंह
बिलासपुर – मस्तूरी विकासखंड के सीपत तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत झलमला में किसानों की फसलों को मवेशियों से बचाने के लिए बनाया गया अस्थायी गौठान अब मवेशियों की मौत को लेकर विवादों में घिर गया है। ग्रामीणों ने दो दिनों में 20 से अधिक, जबकि कुछ ग्रामीणों ने करीब 31 मवेशियों की मौत का दावा किया है। वहीं सरपंच धनलाल साहू ने इस संख्या से इनकार करते हुए कुल 14 मवेशियों की मौत होने की बात कही है। मौतों की वास्तविक संख्या और कारण को लेकर प्रशासनिक जांच की मांग उठने लगी है। ग्रामीणों के मुताबिक शनिवार को 23 और रविवार को करीब 8 मवेशियों की मौत हुई।
उनका आरोप है कि लगातार बारिश के कारण गौठान परिसर पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गया था। सीमित जगह में बड़ी संख्या में मवेशियों को रखने के बावजूद उनके लिए पर्याप्त चारा, पानी और बारिश से बचने की व्यवस्था नहीं थी। बताया गया कि करीब दो महीने पहले खुले मैदान में फेंसिंग तार लगाकर अस्थायी गौठान तैयार किया गया था। यहां खेतों में घूमने वाले मवेशियों को पकड़कर रखा जा रहा था और एक समय में 300 से अधिक मवेशी मौजूद थे।
मनरेगा से पैरा जुटाने के बावजूद चारे पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा मजदूरों के माध्यम से किसानों के खेतों से पैरा एकत्र कराया गया था। इसके बावजूद मवेशियों को नियमित और पर्याप्त चारा नहीं मिलने का आरोप है। लगातार बारिश से परिसर में पानी और कीचड़ जमा होने के कारण मवेशियों की हालत और खराब होने की बात भी ग्रामीणों ने कही है।
शवों के निस्तारण पर भी उठे सवाल
मवेशियों की मौत के बाद उनके शवों के निस्तारण को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कुछ शवों को जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर दफनाया गया, जबकि कुछ शवों को नाले के पानी में बहाने अथवा अन्य स्थानों पर फेंकने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सरपंच बोले- 14 मवेशियों की मौत
सरपंच धनलाल साहू ने ग्रामीणों के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि शनिवार को 6 और रविवार को 8 मवेशियों की मौत हुई है। उनके मुताबिक गौठान में चारा-पानी की पर्याप्त व्यवस्था थी और बारिश व बीमारी के कारण मवेशियों की मौत हुई। मृत मवेशियों को बीमारी और दुर्गंध फैलने के खतरे को देखते हुए दफनाया गया। सरपंच ने यह भी कहा कि गौठान का संचालन पंचायत के बजाय किसानों द्वारा किया जा रहा था।ग्रामीणों ने प्रशासन से मृत मवेशियों की वास्तविक संख्या, मौत के कारण, चारा-पानी की व्यवस्था और शवों के निस्तारण की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि झलमला के अस्थायी गौठान में कितने मवेशियों की मौत हुई और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था।