
अचानक पटवारियों के हड़ताल पर चले जाने से कामकाज में बड़ा असर पड़ेगा, इसलिए सरकार को समय रहते विकल्प तलाशने होंगे

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
डिजिटल इंडिया के क्रम में जमीन रिकॉर्ड को भी डिजिटलिकरण किया जा रहा। है ।प्रदेश भर के जमीनों का लेखा-जोखा भुईया सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जा रहा है और सारी व्यवस्था ऑनलाइन करते हुए दलालों की भूमिका खत्म की जा रही है । अब जरूरतमंद दस्तावेज ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं और यही बात पटवारियों को रास नहीं आ रही। जाहिर है नई व्यवस्था से पटवारियों की ऊपरी कमाई का जरिया पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इसी वजह से पटवारी इस नई व्यवस्था की खिलाफत करते नजर आ रहे हैं । नई व्यवस्था से आम आदमी को दिक्कत होने का हवाला देते हुए पटवारियों ने 4 मई से आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है । पटवारियों का दावा है कि नए वर्जन से उन्हें दिक्कत आ रही है। जाहिर है पटवारियों के हड़ताल पर चले जाने से जमीन खरीदी बिक्री, रजिस्ट्री और राजस्व के कार्य में भारी रुकावट पैदा होगी। ऑनलाइन सॉफ्टवेयर भुइयां का नया वर्जन लॉन्च किया गया है ।पटवारियों का आरोप है कि नया सॉफ्टवेयर बेहद पेचीदा है और इस में काम करने में प्रदेश के पटवारियों को भारी दिक्कत हो रही है। अधिकांश पटवारी अप्रशिक्षित है और उनके पास संसाधन भी नहीं है। इस मुद्दे पर प्रदेश के सभी पटवारी 4 मई को रायपुर में एकजुट होंगे और आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। पटवारियों की मांग है कि भुइयां सॉफ्टवेयर को यूजर फ्रेंडली बनाया जाए । पटवारी आज भी रिकॉर्ड मैनुअल रखने के हिमायती है। पटवारियों का दावा है कि फिलहाल सभी रिकॉर्ड ऑनलाइन दुरुस्त नहीं हुए हैं और इसी बीच भुइयां सॉफ्टवेयर में फेरबदल कर दिया गया है। इस वजह से अब खसरा, रकबा, भूस्वामी एंट्री में सुधार करना बेहद कठिन हो गया है। शासन का आदेश है कि पटवारी अपने गांव में, मुख्यालय में रहे। लेकिन सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में ना तो इंटरनेट है और ना ही मोबाइल कवरेज। इसलिए ऑनलाइन काम करना पटवारियों के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है। सरकार की नीतियों पर आरोप लगाते हुए पटवारियों ने कहा कि शासन दोहरी नीति अपना रही है। एक तरफ रजिस्ट्री में नक्शा बटांकन हटा दिया गया है जबकि दूसरी तरफ रजिस्ट्री के बाद नामांतरण बिना नक्शा बटांकन के भुइयां सॉफ्टवेयर ले ही नहीं रहा है । इस कारण से जमीन लेने वाले रोज भटक रहे हैं और पटवारी चाह कर भी उनकी मदद नहीं कर पा रहे। भुइयां सॉफ्टवेयर में त्रुटि का आरोप लगाते हुए पटवारियों ने हड़ताल पर जाने का मन बना लिया है ।लेकिन जानकार बता रहे हैं कि इसके पीछे असली वजह पटवारियों का स्वहित है। पटवारियों की बड़ी कमाई दस्तावेज उपलब्ध कराने में होती थी, लेकिन अब सब कुछ ऑनलाइन हो जाने से उनकी यह कमाई खत्म हो जाएगी। इसीलिए पटवारी चाहते ही नहीं कि व्यवस्था हाईटेक हो और सब रिकॉर्ड डिजिटल रखा जाए। लेकिन अचानक पटवारियों के हड़ताल पर चले जाने से कामकाज में बड़ा असर पड़ेगा, इसलिए सरकार को समय रहते विकल्प तलाशने होंगे।