छत्तीसगढ़बिलासपुर

जेल से धमकी भरे पत्र मामले में जांच शुरू, जेल उप अधीक्षक ने पत्र को बताया फर्जी, आरोप लगाने वाले ने कहा है ठोस सबूत

कथित तौर पर भेजे गए पत्र में हत्या करने की धमकी देने के मामले की जांच शुरू हो चुकी है इस मामले में शुक्रवार को अष्टकोण प्रभारी सोनल डेविड का बयान लिया गया

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य

बिलासपुर केंद्रीय जेल से भेजे गए कथित पत्र में कैदी और कैदी के भाई को जान से मारने की धमकी देने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। गुरुवार को इस मामले में मुकेश यादव ने आईजी से शिकायत की थी जिसके बाद इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सिटी एडिशनल एसपी ओम प्रकाश शर्मा को सौंपी गई है। जिन के समक्ष बयान देने शुक्रवार को अष्टकोण प्रभारी और सहायक जेल अधीक्षक सोनल डेबिट पहुंचे ।आपको याद दिला दें कि 6 अक्टूबर 2018 को बिलासपुर सेंट्रल जेल में कैद रामखिलावन यादव नाम के कैदी को कुछ कैदियों ने बुरी तरह पीटा था आरोप है कि इस मारपीट के पीछे जेल अधीक्षक एस एस तिग्गा और सहायक अधीक्षक सोनल डेविड की मुख्य भूमिका है। उन्होंने रामखिलावन को फसाने के लिए झूठा मामला भी तैयार किया था। इस मारपीट में बुरी तरह जख्मी रामखीलावन का लंबे वक्त तक अपोलो में इलाज चला, लेकिन इसी बीच दावा किया जा रहा है कि केंद्रीय जेल बिलासपुर से एक पत्र कोरबा में रहने वाले मुकेश यादव को भेजा गया है । जिसमें कैदियो को बाहर भेजकर मुकेश यादव की हत्या करने की धमकी दी गई है। इतना ही नहीं बिलासपुर जेल में बंद रामखिलावन यादव् को भी किसी और जेल में शिफ्ट कर साजिश पूर्वक हत्या करने का जिक्र इस पत्र में किया गया है । लेकिन इस पत्र की सत्यता को लेकर ही सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि शुक्रवार को अपना बयान देने पहुंचे सोनल डेविड ने साफ लफ्जो में इस पत्र को फर्जी करार दे दिया। सोनल डेविड के अनुसार मुकेश यादव भी अपराधिक प्रवृत्ति का है और उसके खिलाफ सात आठ मामले दर्ज है। मुकेश यादव बिलासपुर और कोरबा जेल में सजा भी काट चुका है और इसी वजह से वो खुन्नस निकाल रहा है। डेविड ने यह भी कहा कि मुकेश यादव को न्यायालय प्रक्रिया की जानकारी है इसीलिए उसने कूट रचना कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए हैं, ताकि जेल प्रबंधन को परेशान किया जा सके।

मामला हाई प्रोफाइल होता जा रहा है।पत्र का मजमून हैरान करने वाला है। जिसमें मंत्री अधिकारी और जज के नाम का भी जिक्र किया गया है। मामले में जांच शुरू कर दी गई है।

कैदी रामखिलावन यादव के भाई मुकेश यादव द्वारा जेल से कथित रूप से भेजे गए पत्र के सार्वजनिक होने के बाद कोहराम मच गया है। जेल प्रबंधन ईसे फर्जी बता रहा है तो वही मुकेश यादव का दावा है कि खुद को फंसता देख अधिकारी अब लीपापोती कर रहे हैं लेकिन दोषी बच नहीं पाएंगे क्योंकि मुकेश यादव के पास सभी तरह के सबूत मौजूद है।

केंद्रीय जेल बिलासपुर में रामखिलावन यादव के साथ मारपीट तो हुई थी यह स्पष्ट हो चुका है। इस मामले में जेल अधिकारियों की क्या भूमिका है, यह भले ही जेल की चारदीवारी से बाहर ना आ पाई हो लेकिन जिस तरह मुकेश यादव सूचना के अधिकार का प्रयोग करते हुए हर बड़े मंच पर मामले को उछाल रहे हैं उससे जाहिर तौर पर जेल प्रबंधन परेशान हैं ।तो फिर सवाल यही उठता है कि क्या इसी परेशानी में जेल प्रबंधन से बड़ी चूक हो गई है। क्या उन्होंने ऐसा कोई पत्र लिखा है। मामले में सच्चाई तो जांच से ही उजागर होगी। फिलहाल दोनों पक्ष एक दूसरे को फर्जी बताने में जुटे हैं।

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