मुंगेली

भ्रष्टाचार की अमरबेल चट कर गई डेढ़ करोड़ के गार्डन को

आकाश दत्त मिश्रा

पिछली सरकार में हुए भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं । ऐसा ही एक मामला मुंगेली जिले के नवागढ़ रोड स्थित डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम के बगल में बने गार्डन का है। एक करोड़ 59 लाख रुपए की लागत से बनने वाले इस गार्डन का शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह द्वारा 27 नवंबर 2015 को पौधारोपण कर किया गया था, लेकिन आज तक गार्डन अस्तित्व में नहीं आ सका है। हैरानी इस बात की है कि इसके लिए आवंटित भारी-भरकम राशि प्रदान भी कर दी गई है। जाहिर है गार्डन निर्माण के नाम में भारी-भरकम भ्रष्टाचार हुआ है ।

लगातार ऐसी शिकायतें मिलने के बाद मुंगेली कलेक्टर द्वारा जांच के लिए एक टीम बनाई गई थी, जिसने जुलाई 2017 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी और उस के बाद मामले की विस्तृत जांच हेतु नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को पत्र लिखा गया था। इसके बाद 9 फरवरी 2018 को उच्चस्तरीय जांच दल ने गार्डन में हुए भ्रष्टाचार की जांच भी की, लेकिन आज तक उस जांच की रिपोर्ट सामने नहीं आई है। लिहाजा किसी तरह की कार्यवाही भी नहीं हो पाई है। जाहिर है मिलीभगत के इस खेल में रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश हो रही है। कालीन के नीचे कचरा छुपाने की इन कोशिशों से स्पष्ट है कि जनहित के मुद्दे सुलझने वाले नहीं है। इस मामले में मुंगेली में कई आरटीआई एक्टिविस्ट ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी है। जिससे नया भूचाल आ गया है। जिला बनने के बाद मुंगेली में विकास के नाम पर खास कुछ तो हुआ नहीं लेकिन जो योजनाएं बनाई गई उनके नाम पर बंदरबांट जरूर हो गया। जिसका जीता जागता उदाहरण यह गार्डन भी है। डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बने इससे गार्डन में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे देखकर कहा जा सके कि शासन ने इस पर इतना खर्च किया होगा।

आखिर इतनी भारी-भरकम राशि कहां गई और क्यों नहीं इतने सालों में भी इस गार्डन का उन्नयन हो पाया यह यक्ष प्रश्न है । लेकिन समस्या यह है कि इस प्रश्न का जवाब कहीं से नहीं मिल रहा । जनप्रतिनिधि भी इसे लेकर पूरी तरह उदासीन है । एक तरफ शहर को सुंदर और हरा भरा बनाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन एक सर्व सुविधा युक्त गार्डन बनाने की योजना को अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के नाम पर पलीता जरूर लगा दिया है। इसे लेकर पूरी मुंगेली में गहरा आक्रोश है और मुंगेली का यह गार्डन भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुका है। इसी से समझा जा सकता है कि सभी सरकारी योजनाओं के नाम पर किस तरह सरकार के पैसों का दुरूपयोग किया जा रहा है। इस गार्डन के मामले में मौजूदा कलेक्टर और नई सरकार से लोगों ने भारी उम्मीद लगा रखी है कि वे इस गार्डन निर्माण में हुई भ्रष्टाचार को उजागर करेंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी । अगर ऐसा नहीं होता तो फिर इस धारणा को बल मिलेगा की पूरे कुएं में ही भांग मिली हुई है।

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