
इस आयोजन के अंतिम दिन दरिद्र नारायण भोज का भी आयोजन किया जाएगा
बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
गुरुवार से तीन दिवसीय शीतला पूजा की शुरुआत चुचुहिया पारा रेलवे फाटक के सामने हुई। पिछले 69 वर्षों से यहां सार्वजनिक रूप से माता शीतला की पूजा की जा रही है । बंगाल से पहुंचे कुछ उत्साही युवकों ने इसकी शुरुआत की थी। कई पीढ़ियां बदल गई लेकिन आज भी आयोजन का स्वरूप वैसा ही है । मार्च महीने में आमतौर पर गर्मी बढ़ने लगती है और इन्हीं दिनों में चेचक, ज्वर, हैजा जैसी बीमारियां फैला करती थी। धार्मिक मान्यता है कि देवी शीतला माता की पूजा-अर्चना से इन व्याधियों का शमन होता है। इसी मान्यता के साथ हर वर्ष यहां तीन दिवसीय आयोजन किया जाता है। यहां देवी की प्रतिमा किसी भक्त द्वारा प्रदान की जाती है और यह अवसर किसी सौभाग्यशाली को ही प्राप्त होता है।इस वर्ष यह अवसर कार्तिक मजूमदार को मिला है। शीतला माता गर्दभ यानी गधे पर सवार होती है। इनके एक हाथ में कलश और दूसरे में झाड़ू होता है। सांकेतिक रूप से यह शीतलता और स्वच्छता का प्रतीक है। जिन से ही चेचक , ज्वर, हैजा जैसी बीमारी से मुक्ति मिल सकती है ।इन्ही आदर्शों को धार्मिक रीति-रिवाजों में ढालकर प्रतीकात्मक स्वरूप में पेश किया जाता है। शीतला अष्टमी पर यहां देवी प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना और पुष्पांजलि की गई ।
दूर दूर से उनकी पूजा और पुष्पांजलि करने भक्त यहां जुटे थे। इस दौरान यहां गीता पाठ, संध्या आरती और भोग वितरण भी किया गया। हर वर्ष की तरह यहां इस बार भी सोलह प्रहार अखंड हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा। जिसकी शुरुआत शुक्रवार से होगी। इसी के साथ यहां भजन मंडली द्वारा भजन प्रस्तुति भी दी जाएगी जिसके लिए बंगाल नदिया, बलरामपुर से कीर्तन मंडली पहुंची है । इस वर्ष भी चुचुहिया पारा रेलवे फाटक शंकर नगर के साथ हेमू नगर में भी यह आयोजन किया जा रहा है। एक सपने से आरंभ इस आयोजन की पहचान पूरे प्रदेश में है बिलासपुर में बसने वाले अधिकांश बंगाली समाज के लोग इस आयोजन में जरूर शामिल होते हैं जिन की मान्यता है कि यह पूजा करने से मां शीतला की कृपा प्राप्त होती है और गर्मी जनित तमाम बीमारियों से मुक्ति मिलती है इस आयोजन के अंतिम दिन दरिद्र नारायण भोज का भी आयोजन किया जाएगा