
70% अंक पाने वाली उपस्थित छात्रा को बता दिया अनुपस्थित। लापरवाही उजागर होने के बाद अब लीपापोती शुरू
सत्याग्रह डेस्क
भारतीय परंपराओं में गुरु को ईश्वर का दर्जा दिया जाता है। कहां जाता है गुरु माता पिता से भी बढ़कर है, लेकिन कलयुगी गुरु, गुरु से शिक्षक और शिक्षा कर्मी बन चुके हैं और उनके लिए यह केवल एक पेशा भर है । तभी तो अब पहले जैसी गंभीरता इस पेशे के साथ नहीं रही। कई बार ऐसे ही शिक्षकों की लापरवाही का खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ता है। मुंगेली जिले के लोरमी ब्लाक के सालहेघोरी स्थित हाई स्कूल की डिंडौरी निवासी 10वीं की छात्रा नंदिनी साहू के साथ भी ऐसा ही हुआ है। नंदिनी सभी प्रैक्टिकल परीक्षा में उपस्थित थी और उसने प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी सही समय पर सबमिट किया था। और उसने सभी विषयी की परीक्षा भी नियमित उपस्थित होकर दिया था और उपस्थिति रजिस्टर में भी उसके हस्ताक्षर है, लेकिन जब दसवीं की परीक्षा के परिणाम घोषित हुए तो परिणाम देखकर नंदिनी साहू के होश उड़ गए ,क्योंकि अन्य सभी विषयों में अच्छे अंक आने और कुल मिलाकर 70% अंकार्जन के बावजूद उसे पूरक घोषित किया गया था।
इतना ही नहीं नंदिनी साहू को अंकसूची में संस्कृत विषय में अनुपस्थित दर्शाया गया था। नंदिनी और उनके परिजनों को इस बात पर हैरानी हुई और उन्होंने स्कूल पहुंचकर प्राचार्य को इससे अवगत कराया। ग्राम डिंडोरी शासकीय स्कूल के प्राचार्य सीधराम भास्कर को तब जाकर यह एहसास हुआ कि ऑनलाइन डाटा भरते समय उनसे भारी चूक हो गई है। दरअसल नंदिनी साहू के साथ के रोल नंबर वाला छात्र मुकेश साहू सभी दिन अनुपस्थित था। मुकेश की जगह प्राचार्य सीध राम भास्कर ने नंदिनी को अनुपस्थित दर्शा दिया था। जिसके चलते अन्य सभी विषयों में बेहतर अंक हासिल करने के बाद भी नंदिनी को पूरक दर्शाया गया है ।जाहिर है छात्रा का भविष्य इस चूक से बर्बाद हो सकता है । अब अपनी गलती जानने के बाद प्राचार्य मामले की लीपापोती कर सुधार का प्रयास कर रहे हैं। प्राचार्य ने माध्यमिक शिक्षा मंडल से मिलकर मामले के निराकरण की मांग की है और खुद को फंसता देख कर हर गलती की सजा भुगतने की बात भी कह रहे हैं ।जब से माध्यमिक शिक्षा मंडल ने व्यवस्था ऑनलाइन की है, तब से ऐसी चूक बहुतायत में हो रही है खासकर ग्रामीण अंचलों के स्कूलों में इस तरह की त्रुटि अधिक देखी जा रही है ।
हैरानी की बात यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी जी पी भारद्वाज को इसकी जानकारी तक नहीं है ।मीडिया द्वारा अवगत कराए जाने के बाद वे भी जानकारी जुटाने और जांच के बाद कार्यवाही का रटा रटाया जवाब दे रहे हैं ।यह तो अच्छा हुआ कि नंदिनी साहू और उसके परिजनों ने अपनी जागरूकता दिखाई और मामले को प्राचार्य के संज्ञान में लाया । अगर नंदिनी अपने भाग्य को कोस कर चुप बैठ जाती तो उसका यह साल बर्बाद भी हो सकता था ।अब देखने वाली बात यह भी है कि क्या माध्यमिक शिक्षा मंडल प्राचार्य की गलती की सजा छात्रा को देगा या फिर इस मामले में बड़ा दिल दिखाते हुए संस्कृत विषय में छात्रा के अंकों को जोड़कर नई अंक सूची जारी करेगा। कुल मिलाकर इस मामले में पूरी गलती प्राचार्य सीध राम भास्कर की है, जिसकी सजा मासूम नंदिनी भोग रही है ।इसलिए दोषी प्राचार्य के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस कार्य में अन्य स्कूल कर्मचारी एहतियात बरते।