रतनपुर

खूंटाघाट बांध लबालब… वेस्ट वेयर से शुरू हुआ छलकना… नजारा देखने बड़ी संख्या में पहुँचते है पर्यटक

जुगनू तम्बोली

रतनपुर –  अंचल के सबसे प्रसिद्ध बांध और पर्यटक स्थल खुटाघाट में रविवार को वेस्ट वेयर से पानी गिरना आरंभ हो गया । ऐसा बरसों बाद हुआ है जब जुलाई माह में ही बांध छलकने लगा। करीब 1.15 लाख एकड़ में इस बांध से सिंचाई होती है ।पिछले साल अच्छी बारिश के कारण बांध में पर्याप्त पानी था और इस वर्ष कुछ दिनों पहले तक पानी की कमी रही किंतु कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण खारंग नदी में पर्याप्त पानी हो गया जिस कारण रविवार को बांध पूरी तरह भर गया और वेस्ट वेयर से अतिरिक्त पानी गिरना आरंभ हो गया। बांध को सुरक्षित रखने के लिए यह व्यवस्था की जाती है, जिससे बांध में अतिरिक्त पानी जमा होने के बाद वह एक अन्य निकासी से बह जाती है। लेकिन इस विशालकाय बांध में अतिरिक्त जल जब बहकर नदी रूपी निकासी में गिरती है तो यह विहंगम दृश्य किसी झरने की तरह दिखाई पड़ता है, जिस कारण यह नजारा पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र होता है । प्रति वर्ष पर्यटकों को बांध के ओवरफ्लो होने की प्रतीक्षा रहती है । इस वेस्ट वेयर को देखने दूर-दूर से लोग खुटाघाट पहुंचते हैं। अमूमन ऐसा नजारा अगस्त के अंतिम दिनों में या फिर सितंबर माह में नजर आता है लेकिन इस साल  जुलाई के बाद अच्छी बारिश के कारण जुलाई महीने में ही खुटाघाट बांध पूरी तरह भर गया, यह पूरे अंचल के लिए अच्छी खबर है। उम्मीद थी कि एक-दो दिनों में यह पूरी तरह भर जाएगा लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण रविवार को ही बांध पुरा भर गया। यह खबर आसपास फैलते ही लोग इस नजारे को देखने पहुंच रहे हैं। उम्मीद है कि इस साल खुटाघाट बांध यानी संजय गांधी जलाशय पूरी तरह भर जाने से आगामी काफी दिनों तक यह वेस्ट वेयर चालू रहेगा जिससे यहां पर्यटकों की आने से आमद बढ़ेगी। खूंटाघाट जलाशय को संजय गांधी (खारंग) जलाशय भी कहा जाता है।

छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर-अंबिकापुर हाईवे पर स्थित जिले के रतनपुर से 12 किलोमीटर दूरी में खारंग नदी पर इस बांध का निर्माण किया गया है। इस बांध का निर्माण स्वतंत्रता के पूर्व 1920-30 के मध्य अंग्रेज शासन काल में किया गया था। इस बांध की सहायता से पूरे क्षेत्र में सिंचाई की प्रक्रिया की जाती है। इसके अलावा बिलासपुर शहर में पानी की आपूर्ति भी इसी बांध से वर्तमान में हो रही है। 

बांध का नाम खुटाघाट क्यों…

इस बांध के निर्माण के समय उसके डुबान क्षेत्र के पेड़ों को काटा नहीं गया था, जिस वजह से इस क्षेत्र के डूबने के बाद लकड़ी के ठुंठ यहां आज भी मौजूद हैं, छत्तीसगढ़ी में लकड़ी के इन ठूंठ को ‘खूंटा’ कहा जाता है जिस वजह से कालांतर में इस जगह को खूंटाघाट के नाम से जाना जाता है।

error: Content is protected !!
Letest
दिनदहाड़े लूट और उठाईगिरी गिरोह बेनकाब... 7 वारदात, 9.83 लाख की लूट, बिहार के दो आरोपी जांजगीर पुलिस... मस्तूरी विकासखंड के 8 ग्रामों में उचित मूल्य राशन दुकान संचालन हेतु आवेदन आमंत्रित, स्व सहायता समूह,... बिलासपुर सराफा लूट कांड: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में शॉर्ट एनकाउंटर, एक आरोपी के पैर में लगी गोली,... छत्तीसगढ़ में बढ़ी ब्राउन शुगर की डिमांड....अब मुंगेली जिले में ब्राउन शुगर के साथ 5 आरोपी गिरफ्तार, प... VIDEO बिलासपुर लूटकांड अपडेट: उरतुम के पास कार बरामद, लेकिन ढाई किलो सोना और साढ़े तीन लाख लेकर फरार... कोटा - बेलगहना क्षेत्र में दो अलग-अलग सड़क हादसे...4 लोगों की दर्दनाक मौत, एक हादसे में ट्रेलर घाटी ... केंद्रीय जेल के किचन में कैदी ने हंसिया से रेत लिया अपना गला...हालत गंभीर, सिम्स में चल रहा उपचार, मस्तूरी: ट्रक की चपेट में आए बाइक सवार दंपति...मां सहित 6 माह की बेटी की मौके पर दर्दनाक मौत, मचा हड़... सर्पदंश मुआवजा घोटाला: फर्जी दस्तावेज से 4 लाख की सहायता हड़पी...महिला समेत अन्य पर FIR दर्ज पचपेड़ी:- तालाब में गिरा अनियंत्रित ट्रैक्टर... इंजन में दबकर ड्राइवर की मौत, 2 मजदूर घायल,