छत्तीसगढ़बिलासपुर

जैसे किया मीडिया को मैनेज , वैसे ही गांव को करते तो क्यों होता हंगामा

गुरुवार-को उसलापुर पंचायत भवन में वह हंगामा बरपा की ठंड के मौसम में भी अधिकारियों के माथे से पसीने की बूंदें टपकने लगी।

उसलापुर ग्राम पंचायत का भी यही हाल है जहां अशोक सिंह ठाकुर की तूती बोलती है वैसे तो पत्नी संतोषी सिंह सरपंच है लेकिन इन्हें सुपर सरपंच कह सकते हैं आम नागरिक की क्या कहें पंचों से दुर्व्यवहार आम बात है और ऐसा इसलिए करना पड़ता है क्योंकि इन्हें विकास से सख्त नफरत है तभी तो उसलापुर में विकास को ये दाखिल ही नहीं होने दे रहे सरकारी योजनाएं यहां फाइलों में दफन हो कर दम तोड़ देती है और उन्हें भ्रष्टाचार के तले इस कदर दबा दिया जाता है कि कोई सबूत ना बचे ऐसे में जब भी कोई क्रांतिकारी बनकर विरोध में आवाज उठाता है तो उसकी आवाज कुचलना अशोक सिंह को बखूबी आता है इलाके के दबंग अशोक सिंह के लिए गुरुवार संकट कारी रहा ।संकटमोचक बन कर आए जनपद अध्यक्ष सचिव की भी एक न चली जब संतोषी और अशोक के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकते हुए पंचों और ग्राम पंचायत के नागरिकों ने मोर्चा खोल दिया तो फिर इनसे जवाब देते ना बना ।जवाब देते भी तो क्या ? ऐसा कोई क्षेत्र नहीं छोड़ा जहां भ्रष्टाचार ना किया हो गांव ओडीएफ घोषित हो चुका है लेकिन आधे शौचालय भी नहीं बने हैं ग्रामीण शौचालय की मांग करते हैं तो महिला सरपंच दो टूक कह देती है कि हितग्राहियों का पैसा उन तक नहीं पहुंचा है यही हाल प्रधानमंत्री आवास योजना का भी है गांव में बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो रही बिजली पानी सड़क नाली की बदहाल व्यवस्था ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया और गुरुवार को पंचायत भवन में आयोजित जनसभा में नागरिकों का गुस्सा ऐसे फूटा कि सरपंच और सरपंच पति की की घिग्गी बंध गई मौके पर पहुंचे मीडिया कर्मियों ने ताबड़तोड़ सवाल कर सरपंच पति और सरपंच की मुसीबतों को दुगना कर दिया आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे पति पत्नी से जब जवाब देते नहीं बना तो फिर मीडिया को मैनेज करने की कवायद शुरू कर दी गई साम दाम दंड भेद सभी नीति अपनाई गई लोगों ने बड़े भरोसे के साथ सरपंच को चुना है क्योंकि वह विकास चाहते हैं गांव में काम करने की बजाय अपनी तिजोरी भरने की कोशिश के खिलाफ एक दिन बगावत का बिगुल फूंकना ही था जो फूंक दिया गया यह सब कुछ अधिकारियों के समक्ष हुआ लेकिन मिलीभगत की वजह से वे भी बगले झांकते नजर आए अपनी पहुंच और रसूख का इस्तेमाल कर सरपंच पति भले ही खबरों को रोक दे लेकिन उनकी जवाबदेही असल में तो अपने ही ग्राम पंचायत के नागरिकों के प्रति है जो उनकी कारगुजारी से भलीभांति वाकिफ है ऐसे में उनके लिए सत्ता की राह बेहद मुश्किल हो चुकी है फिलहाल उन्हें जवाब देना होगा उन सभी सवालों का जो पंचों ने जनता के साथ गुरुवार को उनसे पूछे हैं इस मामले में जांच तय है और जांच हुई तो फिर सरपंच और सरपंच पति का नपना भी आप तय मान लीजिए।

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