
जुगनू तंबोली
बिलासपुर – रतनपुर की माटी में जन्मी और पली-बढ़ी कैप्टन डॉ. प्राची शर्मा ने अपने साहस, समर्पण और कड़ी मेहनत से पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। भारतीय सेना के आर्मी मेडिकल कोर में कैप्टन के पद पर पदस्थ प्राची शर्मा का बुधवार को रतनपुर आगमन पर महामाया चौक में भव्य स्वागत किया गया। नगरवासियों ने तालियों, पुष्पवर्षा और नारों के साथ अपनी वीरांगना बेटी का अभिनंदन किया। प्राची शर्मा शिक्षक दम्पति मीरा शर्मा एवं अनिल शर्मा की सुपुत्री हैं। उन्होंने रतनपुर के सरस्वती शिशु मंदिर से स्कूली शिक्षा प्राप्त की और आगे की पढ़ाई ताईशान मेडिकल यूनिवर्सिटी, चीन से एमबीबीएस कर पूरी की। चीन से लौटने के बाद उन्होंने पहले ही प्रयास में एफएमजी परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
कोरोना महामारी के कठिन दौर में उन्होंने एम्स रायपुर में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री शहरी चिकित्सा सेवा में भी योगदान दिया। उनके सेवा भाव और समर्पण ने उन्हें भारतीय सेना तक पहुंचाया। जनवरी 2023 में उन्होंने कर्नाटक के बेलगांव स्थित आर्मी ट्रेनिंग सेंटर से अपने सैन्य जीवन की शुरुआत की।
प्राची को प्रशिक्षण के चार माह के भीतर ही लखनऊ में विशेष सैन्य प्रशिक्षण के लिए चयनित किया गया।
25 जुलाई 2023 को प्रशिक्षण पूरा होते ही उन्हें जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील साम्बा सेक्टर में तैनात किया गया। वहां उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” में हिस्सा लिया और विषम परिस्थितियों में मातृभूमि की रक्षा की। अंतर्राष्ट्रीय कन्या शिशु दिवस के दिन उन्हें कमीशनिंग मिली, जिसमें उनके पिता अनिल शर्मा एवं कर्नल रजनी ने उनके कंधों पर तीन-तीन स्टार लगाकर सेना में उनका स्वागत किया।
यह क्षण किसी भी पिता के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक बन गया। प्राची आज रतनपुर की बेटियों के लिए प्रेरणा की प्रतिमूर्ति बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि बेटियाँ सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं हैं, वे जरूरत पड़ने पर बंदूक भी थाम सकती हैं और सरहद की रक्षा कर सकती हैं।
उनके सम्मान में नगरवासियों ने महामाया चौक पर स्वागत समारोह आयोजित किया। प्राची ने भावुक होकर कहा, “यह सम्मान मेरी नहीं, हर उस बेटी की जीत है जो सपनों के लिए लड़ना जानती है।” रतनपुर के इतिहास में यह दिन गौरव का प्रतीक बन गया है, जब नगर की बेटी ने अपने साहस और समर्पण से राष्ट्रीय मंच पर पहचान बनाई।