जंगलमुंगेली

विश्व पर्यावरण दिवस पर स्टार्स ऑफ टुमारो वेलफेयर सोसायटी ने पौध संरक्षण का दिया अनोखा संदेश

आकाश दत्त मिश्रा

आज धरती का तापमान असामान्य रूप से बढ़ घट रहा है। जिन इलाकों में ठंड पड़ा करती थी, वहां गर्मी पड़ रही है और गर्म इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है । पूरी दुनिया में बढ़ता प्रदूषण ओजोन की परत को भी नुकसान पहुंचा रहा है और ग्लोबल वार्मिंग आज की हकीकत है। यह सब कुछ जानते बुझते हुए भी हम शहरीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं और शहरी करण के एवज में हम वनों और पेड़ों की कुर्बानी देने में संकोच भी नहीं रहे हैं सोशल मीडिया से लेकर अखबारों और चर्चाओं में पेड़ लगाने की बात खूब होती है।

पेड़ लगाने के आयोजन भी ढेर सारे होते हैं ,लेकिन फिर भी पेड़ कहीं नजर नहीं आते। दरअसल पौधरोपण भी एक औपचारिकता भर बनकर रह गई है। बड़े बड़े चेहरे आते हैं, नुमाइशी तौर पर पौधे लगाए जाते हैं और फिर उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। ऐसे में अधिकांश पौधे कुछ ही दिनों में मुरझा कर गायब हो जाते हैं। पता कीजिए पिछले 10 सालों में जिन जिन स्थानों पर पौधरोपण किया गया था आज उनके क्या हालात हैं। यक़ीनन आप देखकर हैरान रह जाएंगे कि ऐसे स्थानों पर एक भी पौधे जीवित नहीं हैं या फिर इक्का-दुक्का पौधे ही आपको मिलेंगे। लिहाजा पेड़ लगाना ही काफी नहीं है। पेड़ लगाने के साथ उनका संरक्षण, उससे भी अधिक जरूरी है। इसी बात को मुंगेली के स्टार्स ऑफ टुमारो वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों ने समझा । सोसायटी द्वारा वर्षभर पेड़ो की देखभाल और हिफाजत की जाती है। विश्व पर्यावरण दिवस पर भी इस प्रकृति के लिए संकल्पित संस्था ने पेड़ लगाने की जगह मौजूदा पेड़ों को बचाने पर ही अधिक जोर दिया। सोसायटी द्वारा पूर्व में लगाए गए पौधों का मेंटेनेंस इस बुधवार विश्व पर्यावरण दिवस पर किया गया। बीते समय में संस्था द्वारा जो पौधे लगाए गए थे उनकी सुरक्षा के लिए उन्हें ट्री गार्ड का सुरक्षा घेरा प्रदान किया गया था, लेकिन अब पेड़ ट्री गार्ड से ऊपर आ चुके हैं और कुछ जानवर पेड़ों को नुकसान पहुंचाने लगे हैं। इसलिए इस पर्यावरण दिवस पर स्टार्स ऑफ टुमारो के सदस्यों ने मौजूदा ट्री गार्ड के ऊपर अतिरिक्त जाली लगाकर पेड़ों को सुरक्षा प्रदान की। साथ ही ट्री गार्ड के अंदर उगाए अनावश्यक खरपतवारो को भी साफ कर पौधों को सिंचित किया।

आमतौर पर विश्व पर्यावरण दिवस पर लोग पौधरोपण करते हैं लेकिन भारत के मौसम की अगर बात करें तो 5 जून का समय साल के सबसे गर्म दिनों वाला समय होता है, इसलिए दुनिया का पिछलग्गू बन कर इस दौरान पौधरोपण करना बेवकूफी से कम कुछ भी नहीं है। भारत में तो जुलाई के महीने में ही पौधरोपण किया जाना चाहिए। इसी बात को समझते हुए स्टार्स ऑफ टुमारो ने इस दिन नुमाइशी पौधों का रोपण नहीं किया बल्कि पिछले साल लगाए गए 1000 से अधिक पौधों को ही सुरक्षित करने का प्रयास किया। संस्था द्वारा करीब 700 पौधों को ट्री गार्ड से सुरक्षा प्रदान की गई है, जिस वजह से अधिकांश पौधे, पेड़ का आकार लेने लगे हैं । संस्था द्वारा जहां मुंगेली शहर में हरियाली लाने का प्रयास किया जा रहा है , वहीं संस्था के सदस्य ग्रामीण इलाकों में भी पेड़ लगा कर पर्यावरण को बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। स्टार्स ऑफ टुमारो के सदस्यों ने लोगों से पेड़ लगाने और उन को संरक्षण देने का आह्वान करते हुए कहा कि अस्पताल में थोड़ी देर ऑक्सीजन देने वाले डॉक्टर को तो हम बिल का भुगतान कर भी भगवान मानते हैं, जबकि जीवन भर मुक्त में ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों की हम कदर नहीं करते। अगर पेड़ नहीं होंगे तो फिर हमारा जीवन भी एक पल का नहीं होगा लेकिन कृतघ्न मानव पेड़ों का महत्व नहीं समझता। जो पेड़ जिंदगी दे सकते हैं उनका इस्तेमाल ईंधन और फर्नीचर के लिए किया जाता है, जबकि इसके विकल्प मौजूद हैं । इंसान को अपना और इस धरती का वजूद अगर बचाना है तो फिर अनिवार्य रूप से पेड़ों को भी बचाना होगा। यही संदेश विश्व पर्यावरण दिवस पर स्टार्स ऑफ टुमारो ने दिया। अपने नाम के अनुरूप यह संस्था आज की नहीं बल्कि आने वाले भविष्य की चिंता कर रही है । नई पीढ़ी की चिंता कर रही है ,और इस चिंतन में सबके शामिल होने की भी जरूरत है।

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