
डेस्क
राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ के नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति , अधिनियम 1984 में संशोधन कर पट्टाधृति अधिकार के पट्टों को भूमि स्वामी अधिकार में परिवर्तित करने, पट्टाधारी के कब्जेवाली अतिरिक्त जमीन के निर्धारित सीमा तक नियमितीकरण, अवैध या अनियमित पट्टा हस्तांतरण के नियमितीकरण और भू-उपयोग के प्रयोजन में परिवर्तन का नियमितीकरण करते हुए भू-स्वामी अधिकार प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसे अमल में लाने के लिये कलेक्टर डाॅ.संजय अलंग द्वारा बैठक लेकर शीघ्र कार्यवाही प्रारंभ करने के निर्देश दिये।
बैठक में कलेक्टर ने जिले में निरीक्षण दल का गठन कर 30 अक्टूबर तक स्थल निरीक्षण कर प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया।
निरीक्षण दलों में राजस्व अधिकारी के साथ-साथ स्थानीय नगरीय निकाय के अधिकारी तथा ग्राम एवं नगर निवेश विभाग के अधिकारी शामिल रहेंगे। उन्होंने बताया कि पट्टाधारी के कब्जे के अधीन अधिक भूमि व्यवस्थापित मूल भूमि से 50 प्रतिशत की निर्धारित सीमा तक नियमितीकरण किया जायेगा। इसके तहत नगर पंचायतों में 1500 वर्गफुट, नगर पालिकाओं में 1200 वर्ग फुट और नगर निगमों में 1050 वर्ग फुट भूमि का नियमितीकरण किया जायेगा। पट्टाधारी द्वारा निर्धारित विकास प्रभार जमा कराये जाने पर कब्जे की अतिरिक्त भूमि को मूल पट्टाधारी के पक्ष में पट्टा प्रदान कर नियमितीकरण या भू-स्वामी अधिकार प्रदान किया जायेगा।
वर्ष 1984 में दिये गये पट्टों की तीस वर्ष की अवधि हो चुकी है। इन पट्टों के नवीनीकरण की कार्यवाही भी प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं।