
रमेश राजपूत
बिलासपुर – छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा संचालित धान खरीदी व्यवस्था इस वर्ष गंभीर अव्यवस्थाओं का शिकार हो गई है। खरीफ सीजन की शुरुआत से ही किसान अपनी उपज बेचने के लिए परेशान हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस और प्रभावी समाधान नहीं किया गया है। इसी के विरोध में भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश ने 16 जनवरी को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में आंदोलन करने का ऐलान किया है। भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष माधो सिंह ने कहा कि कभी किसानों को समय पर टोकन नहीं मिल रहा है, तो कभी धान खरीदी की सीमा (लिमिट) घटा दी जा रही है। वहीं कई खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था, तकनीकी खामियां और कर्मचारियों की कमी के कारण किसानों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। इन समस्याओं के चलते किसान महीनों से दर-दर भटकने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि चिंता का विषय यह भी है कि धान खरीदी को सरल और सुचारु बनाने के बजाय शासन के दिशा-निर्देश किसानों की ईमानदारी पर सवाल खड़े करते नजर आ रहे हैं।

वर्तमान स्थिति यह है कि धान खरीदी सत्र समाप्त होने में मात्र 15 दिन शेष हैं, जबकि अब तक लगभग 60 प्रतिशत धान की ही खरीदी हो पाई है। यह स्थिति सीधे तौर पर किसानों के साथ अन्याय है, क्योंकि खेतों में कड़ी मेहनत कर धान उपजाने वाला किसान आज अपनी ही उपज बेचने के लिए संघर्ष कर रहा है। भारतीय किसान संघ ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर 16 जनवरी को सभी जिला मुख्यालयों में आंदोलन करने का निर्णय लिया है। आंदोलन के दौरान किसान प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे और सरकार से सभी किसानों को तत्काल टोकन उपलब्ध कराने, धान खरीदी की लिमिट बढ़ाने, खरीदी की समय-सीमा आगे बढ़ाने तथा पूरी व्यवस्था को सुचारु करने की मांग करेंगे। माधो सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों के बीच अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है और यह स्पष्ट होता जा रहा है कि सरकार न्यूनतम धान खरीदी करना चाहती है। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान संघ किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ लगातार संघर्ष करता रहेगा और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रहेगा।