मस्तूरी

मस्तूरी : प्रायमरी स्कूल के मासूम बच्चों से पानी ढुलवाने का वीडियो वायरल… शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल,

उदय सिंह

मस्तूरी – विकासखंड मस्तूरी अंतर्गत ग्राम पंचायत ओखर के प्रायमरी स्कूल से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद शिक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता और स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में दो मासूम स्कूली बच्चों को एक बड़े टप में पानी ढोते हुए साफ देखा जा सकता है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो दो दिन पूर्व ग्राम पंचायत ओखर के पंच विनोद पटेल द्वारा बनाया गया था, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर साझा किया गया। वीडियो के सामने आने के बाद क्षेत्र में नाराजगी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राथमिक स्कूल, जहां बच्चों को पढ़ाई के साथ सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल मिलना चाहिए, वहां इस तरह बच्चों से शारीरिक श्रम कराना बेहद निंदनीय है। यह घटना न केवल बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त लापरवाही को भी उजागर करती है। गौरतलब है कि शासन स्तर पर स्कूलों में चपरासी, सफाई कर्मी तथा मध्यान्ह भोजन के संचालन के लिए स्व-सहायता समूहों की व्यवस्था की गई है।

इसके बावजूद यदि मासूम बच्चों से पानी ढुलवाया जा रहा है, तो यह स्पष्ट रूप से जिम्मेदारों की उदासीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है। सवाल यह उठता है कि जब हर स्तर पर व्यवस्था तय है, तो फिर बच्चों से इस प्रकार का काम क्यों कराया जा रहा है। इस मामले को लेकर पंच विनोद पटेल ने जिला एवं मस्तूरी मुख्यालय में पदस्थ उच्च अधिकारियों से तत्काल संज्ञान लेने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि वीडियो बनाकर उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष को बदनाम करने का नहीं, बल्कि स्कूलों में व्याप्त अव्यवस्थाओं और जिम्मेदारों की लापरवाही को सामने लाने का प्रयास किया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी तनख्वाह उठाने वाले अधिकारी और कर्मचारी किस प्रकार मॉनिटरिंग कर रहे हैं, यह इस घटना से स्पष्ट हो जाता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। प्राथमिक स्तर पर बच्चों को पढ़ाई, खेल और मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है, न कि उनसे ऐसे कार्य कराए जाने चाहिए जो उनके अधिकारों के खिलाफ हों। बाल अधिकार संरक्षण कानून के तहत भी बच्चों से इस प्रकार का श्रम कराना अपराध की श्रेणी में आता है। वायरल वीडियो के बाद अब प्रशासन की भूमिका पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी शिक्षकों या कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यह घटना एक बार फिर सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या ठोस कदम उठाता है।

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