कोटा

आंगनबाड़ी में ‘कट-कमीशन’ का खेल….सुपरवाइजर पर उगाही-शोषण के गंभीर आरोप, कार्यकर्ताओं ने किया खुलासा,

रमेश राजपूत

बिलासपुर – जिले के कोटा जनपद पंचायत क्षेत्र के बेलगहना से एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में भ्रष्टाचार और शोषण की परतें खुलती नजर आ रही हैं। बेलगहना सेक्टर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी ही सेक्टर सुपरवाइजर कीर्ति किरण मोंगरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कार्यकर्ताओं ने ब्लॉक मुख्यालय पहुंचकर एसडीएम टी. अरविंद कुमार को लिखित शिकायत सौंपते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से हर महीने अलग-अलग मदों में जबरन वसूली की जा रही है।

मासिक रिपोर्ट के नाम पर प्रति केंद्र 20 रुपए की वसूली, बच्चों के लिए आने वाली खेल सामग्री के परिवहन के नाम पर पैसा मांगना, और सुपोषण चौपाल की राशि में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि कोई पैसे देने से मना करता है, तो उसके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है और झूठे आरोप लगाकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कुछ केंद्रों को जानबूझकर संसाधनों से वंचित रखा जा रहा है। एक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके केंद्र को खिलौने नहीं दिए गए और यह कहकर टाल दिया गया कि वहां बच्चे नहीं हैं।

इससे साफ है कि विभागीय योजनाओं का लाभ बच्चों तक पहुंचाने के बजाय बीच में ही हेरफेर किया जा रहा है। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि टीए बिल के भुगतान में कटौती कर हिस्सा मांगा जाता है। सुपोषण चौपाल के लिए आने वाली राशि में भी गड़बड़ी कर उसे बांट लिया जाता है। इतना ही नहीं, एक कार्यकर्ता को भोजन से वंचित करने और उसके परिजनों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप भी सामने आया है, जो इस पूरे मामले को और गंभीर बना देता है। सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा खेल केवल एक सुपरवाइजर तक सीमित नहीं है, बल्कि विभाग के उच्च अधिकारियों की भी इसमें मौन सहमति बताई जा रही है।

अंदरखाने हिस्सा तय होने की बात सामने आ रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं और पूरा तंत्र इसमें शामिल हो सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम टी. अरविंद कुमार ने जांच के बाद सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। वहीं परियोजना अधिकारी सुरुचि श्याम ने भी शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है।

फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है, लेकिन जिस तरह से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने खुलकर आरोप लगाए हैं, उससे महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ भ्रष्टाचार का मामला होगा, बल्कि बच्चों के हक और पोषण योजनाओं के साथ बड़ा खिलवाड़ भी माना जाएगा। अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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