
उदय सिंह
बिलासपुर – छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में जाने वाले श्रमिकों के लिए एक चेतावनी भरा मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के पुणे जिले में बिलासपुर के एक श्रमिक को बंधक बनाकर मारपीट करने की घटना ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके शोषण की भयावह तस्वीर उजागर कर दी है।मिली जानकारी के अनुसार, मस्तूरी क्षेत्र के पचपेड़ी सुकुलकारी गांव निवासी संतोष महिलांगे नवंबर 2025 में अपने परिवार के साथ रोज़गार की तलाश में महाराष्ट्र के चांदे गांव गया था। वहां एक ठेकेदार के माध्यम से उसे मजदूरी का काम मिला।

शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन कुछ समय बाद ठेकेदारों का व्यवहार बदल गया और शोषण का दौर शुरू हो गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब संतोष ने अपने इलाज के लिए मेहनताने की मांग की, तो ठेकेदार भुवनेश्वर राय और सुरेंद्र राय ने उसके साथ गाली-गलौज करते हुए बेरहमी से मारपीट की। इतना ही नहीं, आरोप है कि उसे जबरन बंधक बनाकर रखा गया, ताकि वह मजदूरी का पैसा न मांग सके और काम करने के लिए मजबूर रहे। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कथित रूप से मारपीट और दबाव बनाने के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद मामला और गंभीर हो गया है और प्रशासन पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
किसी तरह पीड़ित के परिजन वहां से निकलकर बिलासपुर पहुंचे और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद उन्हें श्रम विभाग में भी शिकायत करने की सलाह दी है, ताकि मामले की विस्तृत जांच हो सके और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा कि उसने सदस्य को सुरक्षित छुड़ाया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। परिवार ने बताया कि वे भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं और उन्हें न्याय की उम्मीद केवल प्रशासन से है। यह घटना उन हजारों मजदूरों के लिए चेतावनी है, जो बेहतर रोजगार के लालच में बिना किसी पंजीकरण या सुरक्षा के दूसरे राज्यों में काम करने चले जाते हैं।

मस्तूरी, बिल्हा और आसपास के क्षेत्रों से हर साल बड़ी संख्या में मजदूर महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य राज्यों में पलायन करते हैं, जहां उन्हें अक्सर बिचौलियों और ठेकेदारों के माध्यम से काम मिलता है। इन श्रमिकों का कोई ठोस सरकारी रिकॉर्ड नहीं होता, जिससे संकट की स्थिति में उनकी पहचान और मदद करना मुश्किल हो जाता है। कई बार मजदूरों से जबरन काम कराया जाता है, मजदूरी रोकी जाती है, पहचान पत्र छीन लिए जाते हैं और विरोध करने पर मारपीट या बंधक बनाने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी यह एक बड़ी चुनौती है कि ऐसे श्रमिकों का डेटा व्यवस्थित रूप से संकलित नहीं हो पाता।

यही कारण है कि हादसा या शोषण होने पर कार्रवाई में देरी होती है। बाहर काम पर जाने से पहले श्रमिकों को श्रम विभाग में पंजीकरण कराना चाहिए, ठेकेदार की पूरी जानकारी लेना चाहिए और अपने दस्तावेज सुरक्षित रखना चाहिए। साथ ही, किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय पुलिस और प्रशासन से तुरंत संपर्क करना चाहिए। फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह घटना न केवल एक परिवार की पीड़ा है, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे शोषण के मामले लगातार बढ़ते रहेंगे।