
उदय सिंह
बिलासपुर – सिविल लाइन थाना क्षेत्र के नेहरू नगर में स्थित एक जर्जर सामुदायिक भवन को लेकर विवाद गहरा गया है। भवन स्वामियों ने आरोप लगाया है कि सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा भवन को हटाने की अनुमति दिए जाने के बावजूद हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर तोड़फोड़ कार्य को जबरन रुकवा दिया और एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी।मिली जानकारी के अनुसार नेहरू नगर स्थित उक्त भवन कई वर्षों से जर्जर अवस्था में था। भवन में न तो दरवाजे बचे थे और न ही खिड़कियां। स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थान असामाजिक तत्वों और शराबखोरी का अड्डा बन चुका था, जिससे आसपास के रहवासियों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। भू-स्वामियों का कहना है कि जिस भूमि पर यह भवन स्थित है, उसका पंजीयन वर्ष 1971 में स्वयं हाउसिंग बोर्ड द्वारा किया जा चुका है और यह उनकी निजी एवं पैतृक संपत्ति है। भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए उन्होंने न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर भवन हटाने की अनुमति मांगी थी। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार न्यायालय सिटी मजिस्ट्रेट, बिलासपुर ने 28 अक्टूबर 2025 को तहसीलदार बिलासपुर को पत्र जारी कर मामले की जांच रिपोर्ट मांगी थी।

आदेश में उल्लेख है कि संबंधित भूमि खसरा नंबर 362/73, रकबा 0.169 हेक्टेयर पर लगभग 80 वर्ष पुराना जर्जर मकान स्थित है, जिसे आवेदक अपने स्वयं के व्यय पर हटाना चाहता है। इसके लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 152 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया था। भू-स्वामियों का आरोप है कि न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने और अनुमति मिलने के बाद जब भवन को हटाने का कार्य शुरू किया गया, तब हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी जूही श्रीवास्तव और गुंजन श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे और कार्य रुकवाने का प्रयास किया। उन्होंने अधिकारियों के इस रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब संपत्ति का स्वामित्व पहले ही स्पष्ट है, तब भवन हटाने में बाधा क्यों उत्पन्न की जा रही है। फिलहाल मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और संबंधित पक्ष प्रशासन से स्पष्ट हस्तक्षेप एवं समाधान की मांग कर रहे हैं।