
रमेश राजपूत
बिलासपुर – गंभीर और दुर्लभ जन्मजात बीमारी Bilateral Choanal Atresia से जूझ रहे एक नवजात को श्री शिशु भवन हॉस्पिटल, बिलासपुर की विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम ने सफल उपचार के बाद नया जीवन दिया। जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में गंभीर परेशानी से जूझ रहे नवजात को करीब एक सप्ताह तक वेंटिलेटर सपोर्ट, जटिल सर्जिकल उपचार और लगभग 30 दिनों की सतत चिकित्सा एवं विशेष नर्सिंग देखभाल के बाद 8 अगस्त को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दी गई।

मुंगेली जिले के लोरमी निवासी गौसिया परवीन के नवजात का जन्म 3 जुलाई 2026 को हुआ था। जन्म के तत्काल बाद बच्चे को सांस लेने में गंभीर दिक्कत होने लगी। जांच में सामने आया कि दोनों नासिका मार्ग जन्म से ही बंद थे। परिजन उसी दिन बच्चे को उपचार के लिए श्री शिशु भवन हॉस्पिटल, बिलासपुर लेकर पहुंचे। नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ. श्रीकांत गिरी के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया और सबसे पहले उसकी श्वसन एवं ऑक्सीजन की स्थिति को नियंत्रित किया।
दुर्लभ बीमारी में समय पर उपचार बेहद जरूरी

डॉ. श्रीकांत गिरी के अनुसार Bilateral Choanal Atresia नवजातों में पाई जाने वाली दुर्लभ जन्मजात स्थिति है, जिसमें नाक के दोनों पिछले वायुमार्ग जन्म से बंद रहते हैं। नवजात शुरुआती अवस्था में मुख्य रूप से नाक से सांस लेते हैं। ऐसे में दोनों मार्ग बंद होने पर बच्चे को गंभीर श्वसन संकट, ऑक्सीजन की कमी और शरीर नीला पड़ने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे करीब एक सप्ताह तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। स्थिति स्थिर होने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आवश्यक तैयारी के साथ जटिल सर्जिकल उपचार किया।

ऑपरेशन के बाद भी बच्चे को लगातार चिकित्सकीय निगरानी और विशेष नर्सिंग केयर में रखा गया। करीब 30 दिनों की सतत चिकित्सा और देखभाल के बाद नवजात ने स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया। इस चुनौतीपूर्ण उपचार में डॉ. श्रीकांत गिरी, डॉ. रवि द्विवेदी, डॉ. अंकित ठकराल, डॉ. प्रणव अंधारे, डॉ. विशाल मांझी और डॉ. मोनिका जायसवाल सहित पूरी चिकित्सकीय टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अस्पताल प्रबंधक नवल वर्मा के मार्गदर्शन में नर्सिंग एवं सपोर्ट स्टाफ ने भी लगातार समर्पण के साथ बच्चे की देखभाल की।
करीब एक महीने बाद स्वस्थ बच्चे को गोद में लेकर जब माता-पिता अस्पताल से घर रवाना हुए तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने चिकित्सकों और अस्पताल की पूरी टीम के प्रति आभार जताया।समय पर उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सा, सतत निगरानी और टीमवर्क के जरिए श्री शिशु भवन हॉस्पिटल की टीम ने एक नन्ही जिंदगी को बचाकर परिवार की उम्मीद को साकार किया।