
उदय सिंह
बिलासपुर – शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मल्हार में कथित अव्यवस्थाओं और शिक्षकों-कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर विद्यार्थियों का आक्रोश गुरुवार को कलेक्ट्रेट तक पहुंच गया। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने अलग-अलग शिकायत आवेदन सौंपने के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी की और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से तत्काल जांच व कार्रवाई की मांग की। विद्यार्थियों ने जिला शिक्षा अधिकारी से भी सीधे सवाल किए और शिकायतों पर अब तक की कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा। विद्यार्थियों द्वारा कलेक्टर के नाम दिए गए आवेदनों में विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकों-शिक्षिकाओं, खेल एवं रेडक्रॉस प्रभारी तथा सफाई कर्मचारी के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। छात्रों का कहना है कि शिकायत करने पर उन्हें डराने-धमकाने तथा प्रोजेक्ट या नंबर काटने की बात कही जाती है। इसी वजह से कई विद्यार्थी अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखने से डरते हैं।शिकायतों में प्राचार्य पर डांटते समय कथित अभद्र भाषा और गाली-गलौज करने तथा विद्यार्थियों से मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। वहीं शिक्षिका संगीता यादव पर शिकायत करने वाले विद्यार्थियों को समझाकर चुप कराने और अन्य शिक्षकों के खिलाफ भड़काने का आरोप लगाया गया है।
शिक्षिका आर. गुप्ता के खिलाफ कथित बदतमीजी, धमकी भरे कॉल और छात्र-छात्राओं तथा अभिभावकों से अपमानजनक व्यवहार की शिकायत की गई है। बालिकाओं को मिलने वाली निःशुल्क सैनिटरी सामग्री के वितरण को लेकर भी विद्यार्थियों ने सवाल उठाए हैं। एक अन्य शिकायत में शिक्षिका वर्मा पर कक्षा संचालन में लापरवाही और विद्यार्थियों के साथ कथित भेदभाव का आरोप है। विद्यार्थियों का दावा है कि अनुपस्थिति के दौरान कक्षा में ताला लगाकर चाबी साथ ले जाने से पढ़ाई प्रभावित होती है। संस्कृत शिक्षक एस. दुबे पर कक्षा में सोने, मोबाइल पर बात करने तथा छात्राओं के साथ कथित अनुचित भाषा एवं व्यवहार के आरोप लगाए गए हैं। विद्यार्थियों ने शिक्षक की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की मांग की है।
खेल और रेडक्रॉस व्यवस्था पर भी सवाल
विद्यार्थियों ने खेल प्रभारी पर खेल के नाम पर राशि लेने के बावजूद सामग्री उपलब्ध नहीं कराने और नियमित रूप से विद्यालय नहीं आने का आरोप लगाया। रेडक्रॉस प्रभारी पर भी संबंधित सामग्री उपलब्ध नहीं कराने की शिकायत की गई है। सफाई व्यवस्था को लेकर छात्रों ने आरोप लगाया कि कई बार कक्षाओं की सफाई का जिम्मा विद्यार्थियों पर ही डाल दिया जाता है, जिससे परिसर में गंदगी और संक्रमण का खतरा बना रहता है। कलेक्ट्रेट में पहुंचे विद्यार्थियों ने अधिकारियों के सामने अपनी शिकायतें रखते हुए गोपनीय और निष्पक्ष जांच की मांग की। विद्यार्थियों के प्रदर्शन और शिकायतों के बाद अब शिक्षा विभाग की भूमिका पर नजर है। छात्रों ने तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि शिकायतों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में प्रशासनिक जांच में ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और विद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था में किन स्तरों पर खामियां हैं। लेकिन यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि आखिर स्कूल की व्यवस्था ठीक है तो बच्चों को कलेक्ट्रेट तक आने की की क्यो जरूरत पड़ी?