
उदय सिंह
बिलासपुर – वन्यजीवों के अवैध शिकार पर रोक लगाने के वन विभाग के दावों के बीच सीपत क्षेत्र से सामने आए ताजा मामले ने जंगलों में चल रही शिकार की गतिविधियों की पोल खोल दी है। ग्राम मंजूरपहरी के दहाइत पारा में वन विभाग की टीम ने दबिश देकर चीतल के मांस के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से बरामद मांस को पकाकर खाने की तैयारी की जा रही थी। मामले की कार्रवाई मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर 6 अक्टूबर को की गई। मुख्य वन संरक्षक मनोज पांडेय और वनमंडलाधिकारी नीरज के निर्देश तथा उप वनमंडलाधिकारी टीआर मरई के मार्गदर्शन में वन परिक्षेत्र अधिकारी यशपाल वर्मा के नेतृत्व में वन परिक्षेत्र बिलासपुर और उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने ग्राम मंजूरपहरी के दहाइत पारा स्थित आरोपियों के घर पर दबिश दी।
तलाशी के दौरान टीम को वन्यप्राणी चीतल का मांस बरामद हुआ। मौके से चैनसिंह 40 वर्ष और राजकुमार 40 वर्ष, दोनों निवासी दहाइत पारा, ग्राम मंजूरपहरी को हिरासत में लिया गया। वन विभाग के मुताबिक पूछताछ में दोनों ने चीतल का अवैध शिकार करने की बात स्वीकार की है।
जंगल में शिकार, घर पहुंचा चीतल का मांस
वन विभाग की कार्रवाई से यह सवाल भी उठ रहा है कि संरक्षित वन्यजीवों का शिकार आखिर किस तरह जारी है। चीतल जैसे वन्यप्राणी का शिकार कर उसका मांस घर तक पहुंचना वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। हालांकि मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई में दोनों आरोपी पकड़ लिए गए।
वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण क्रमांक 17769/11 दर्ज किया है। उनके विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। दोनों आरोपियों को आगे की न्यायालयीन कार्रवाई के लिए पेश किया जा रहा है।