
भुवनेश्वर बंजारे
बिलासपुर – तखतपुर विकासखंड के ग्राम जोगीपुर में वन विभाग के मैदानी अमले के नाक के नीचे वन भूमि के दोहन का बड़ा मामला सामने आया है। जिसकी शिकायत लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में गांव के ग्रामीण जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। जहा उन्होंने जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर बताया कि वन कक्ष क्रमांक 1537, जो वर्षों पहले वन समिति द्वारा पौधारोपण कर ग्राम के मवेशियों के चारागाह के लिए सुरक्षित की गई थी, आज पूरी तरह से कब्जे की भेंट चढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के बीट गार्ड और फॉरेस्टर रोज उसी रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन कभी भी कब्जा रोकने की कोशिश नहीं की। पौधे उखाड़ कर खेत बना दिया गया, बाउंड्री बना दी गई, लेकिन मैदानी अमले ने आंखें मूंदे रखी। इस पूरे मामले में हद ये है कि कब्जा करने वालों में खुद वन विभाग का एक कर्मचारी अमृत मरावी भी शामिल है। ग्रामीणों ने मीडिया से बातचीत करते हुए बड़ा आरोप लगाते हुए बताया है कि रोजगार सहायक, उपसरपंच, पंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता – यानी जो लोग शासन की योजनाओं को लागू करने के लिए हैं, वही लोग वन भूमि का दोहन कर रहे हैं। इस पूरे कारनामे में गांव के सरपंच का पूरा सहयोग होने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का एक ही सवाल है.? क्या यह सिर्फ नाकामी है या मिलीभगत? बिना विभाग की अनदेखी के इतनी बड़ी वन भूमि पर पक्का कब्जा कैसे हो सकता है? उन्होंने जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर यह भरोसा दिलाया है कि इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच हुई तो वन कक्ष क्रमांक 1537 के करीब 120 एकड़ वन भूमि में पेड़ों की बलि चढ़ाकर पक्का कब्जा करने वालो के षड्यंत्र का खुलासा होगा जिसमें वन विभाग के कर्मचारियों की साठ गांठ का भी उजागर होगी। इधर मामले में जिला प्रशासन के द्वारा उचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया है। ऐसे में देखना होगा कि जिले की कीमती वन भूमि को बचाने जिला प्रशासन कितनी गम्भीरता दिखाता है और जनप्रतिनिधियों सहित वन विभाग के नियम विरुद्ध दोहन करने वाले पर कब तक कार्यवाही होती है।