
उदय सिंह
बिलासपुर – सीपत के नवीन तहसील भवन के सामने निजी भूखंड पर खड़ी हो रही बहुमंजिला इमारत अब सवालों के घेरे में है। दो मंजिला भवन का निर्माण पूरा होने के बाद तीसरी मंजिल का काम चलने की बात सामने आई है। भवन के निचले हिस्से में दुकान भी बनाई गई है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि निजी जमीन पर बने इस भवन तक पहुंचने के लिए फिलहाल तहसील कार्यालय की जमीन और परिसर के भीतर से रास्ते का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब जब तहसील परिसर की बाउंड्रीवाल बनने वाली है, तो यह रास्ता बंद होने की स्थिति में निजी भवन तक आवागमन कैसे होगा, इसे लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि तहसील कार्यालय की जमीन पर बाउंड्रीवाल निर्माण की तैयारी चल रही है। जानकारी के अनुसार इसके लिए एनटीपीसी की ओर से राशि उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है और निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है। ऐसे में यदि निजी भवन तक जाने वाला वर्तमान रास्ता तहसील परिसर की सीमा के भीतर आता है तो बाउंड्रीवाल बनने के बाद उस रास्ते का अस्तित्व ही समाप्त हो सकता है।
निजी भवन को सरकारी परिसर से रास्ता किसने दिया
स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि यह निजी जमीन है तो निजी भवन तक पहुंचने के लिए सरकारी तहसील परिसर के भीतर से रास्ता किस आधार पर उपलब्ध कराया गया? क्या इसके लिए किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई है? यदि अनुमति दी गई है तो उसका आधार और दस्तावेज क्या हैं? और यदि कोई अनुमति नहीं है तो वर्षों से सरकारी परिसर के भीतर से निजी भवन तक आवागमन कैसे हो रहा है? भवन में दुकान का निर्माण और अब तीसरी मंजिल का काम होने के बावजूद संबंधित विभागों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी, यह भी जांच का विषय है। निर्माण की अनुमति, भूमि का स्वामित्व, भवन की स्वीकृति और पहुंच मार्ग की वैधता की जांच जरूरी है।
बाउंड्री बनने से पहले सीमांकन जरूरी
तहसील परिसर की बाउंड्रीवाल खड़ी होने से पहले सरकारी और निजी जमीन का विधिवत सीमांकन कराना जरूरी माना जा रहा है। मौके पर सीमांकन से ही यह स्पष्ट होगा कि निजी भवन किस भूमि पर बना है और उसका रास्ता किस जमीन से होकर गुजर रहा है। यदि रास्ता वास्तव में तहसील की जमीन से होकर है, तो निजी भवन को सरकारी कार्यालय परिसर से रास्ता दिए जाने के पूरे मामले की जांच आवश्यक होगी।
नए एसडीएम ने कहा- गुरुवार को होगी जांच
मस्तूरी एसडीएम बजरंग सिंह वर्मा ने बताया कि उन्होंने अभी-अभी कार्यभार संभाला है और उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि गुरुवार को सीपत में लिंक कोर्ट है और उसी दौरान मौके पर जाकर मामले की जांच की जाएगी।अब देखना होगा कि जांच में निजी भवन, दुकान, भूमि की वास्तविक स्थिति और तहसील परिसर से दिए जा रहे रास्ते को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं। बाउंड्रीवाल बनने से पहले यदि सीमांकन और दस्तावेजों की जांच नहीं हुई तो भविष्य में सरकारी जमीन और निजी भवन के रास्ते को लेकर विवाद और गहरा सकता है।
