कोरबा

24 साल से एक ही जिले में जमी है ‘कुर्सी’! ट्रैफिक शाखा के ASI पर उठे सवाल, तबादला नीति के बीच आखिर किस आदेश का मिला संरक्षण?

उदय सिंह

कोरबा – पुलिस विभाग में स्थानांतरण और रोटेशन व्यवस्था का मकसद अधिकारियों-कर्मचारियों को लंबे समय तक एक ही स्थान या संवेदनशील शाखा में जमे रहने से रोकना है। लेकिन कोरबा जिले में ट्रैफिक शाखा से जुड़े एक सहायक उप निरीक्षक की करीब 24 वर्षों से एक ही शहर में पदस्थता अब प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बनती जा रही है। सवाल यह नहीं कि एक कर्मचारी को लंबे समय तक कोरबा में रहने की अनुमति कैसे मिली, बल्कि सवाल यह है कि क्या इसके पीछे कोई विशेष प्रशासनिक आदेश, नियम या अपवाद है? पुलिस विभाग में समय-समय पर तबादले होते रहे हैं। थाना प्रभारी से लेकर उप निरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मियों तक को प्रशासनिक जरूरत के मुताबिक जिले और शाखाएं बदली जाती हैं। ऐसे में किसी ASI का करीब ढाई दशक तक एक ही शहर में बने रहना सामान्य स्थानांतरण व्यवस्था से अलग नजर आता है।

प्रदेश में तबादले होते रहे, ASI की ‘कुर्सी’ क्यों नहीं बदली?

मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संबंधित ASI की पदस्थता ट्रैफिक शाखा में बताई जा रही है। यह ऐसी शाखा है जहां प्रतिदिन ट्रांसपोर्टरों, व्यावसायिक वाहन चालकों, वाहन मालिकों और आम नागरिकों से सीधा संपर्क होता है। संवेदनशील शाखाओं में लंबे समय तक एक ही कर्मचारी की पदस्थता को लेकर सामान्य तौर पर रोटेशन और पारदर्शिता की जरूरत मानी जाती है। अब सवाल है कि पिछले 24 वर्षों में उनकी पोस्टिंग और ट्रांसफर की पूरी हिस्ट्री क्या रही? क्या उन्हें कभी दूसरे जिले या दूसरी शाखा भेजा गया? यदि आदेश जारी हुए तो क्या वे निरस्त या संशोधित हुए? और यदि लगातार कोरबा में रखने का कोई विशेष कारण था तो उसका लिखित रिकॉर्ड कहां है?

विधानसभा के जवाब के बाद बढ़ी पारदर्शिता की मांग

छत्तीसगढ़ विधानसभा में 7 मार्च 2025 को ASI संवर्ग की स्थानांतरण व्यवस्था से संबंधित जानकारी सरकारी जवाब के माध्यम से सामने आई थी। ऐसे में कोरबा के इस ASI की करीब 24 वर्षों की पदस्थता को उसी प्रशासनिक व्यवस्था की कसौटी पर देखने की मांग उठ रही है।

सवाल ASI से ज्यादा व्यवस्था पर

24 साल तक एक ही शहर में पदस्थ रहने वाले इस ASI का मामला अब सिर्फ एक कर्मचारी की पोस्टिंग का विषय नहीं रह गया है। यह पुलिस विभाग की ट्रांसफर नीति, रोटेशन व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सीधा सवाल है। अब प्रदेश की निगाहें इस बात पर हैं कि विभाग इस लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड सामने लाकर बताएगा या नहीं कि आखिर कौन-सा नियम, आदेश या विशेष परिस्थिति थी, जिसने कोरबा के इस ASI की ‘कुर्सी’ को 24 साल तक जिले से नहीं बदलने दिया?

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