
रमेश राजपूत
बिलासपुर/पेंड्रा – जमीनों की बढ़ती कीमतों के बीच भूमि विवाद के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अब पेंड्रा में जमीन पर कथित कब्जे और सीमांकन में हो रही देरी का मामला चर्चा में है। बिलासपुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 59 की पार्षद सुनीता जगत ने अपनी जमीन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2011 में खरीदी गई जमीन पर कब्जा करने की नीयत से कुछ लोग लगातार षड्यंत्र कर रहे हैं। इस मामले में उन्होंने इकबाल सिंह समेत अन्य लोगों पर जमीन हड़पने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
2011 में खरीदी थी 16 डिसमिल जमीन
सुनीता जगत के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2011 में पेंड्रा में बिलासपुर रोड स्थित रमेश कोल से खसरा नंबर 2480/1 से संबंधित 16 डिसमिल जमीन खरीदी थी। जमीन खरीदने के बाद उन्होंने मौके पर एक झोपड़ी बनाकर खुद की नाम से मीटर भी लगा के रखी थी उम्मीद थी कि भविष्य में यह संपत्ति उनके काम आएगी, लेकिन अब यही जमीन उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है। उनका आरोप है कि जमीन के आगे और पीछे की ओर पहले से ही कब्जा किया जा रहा है। ऐसे में उनकी जमीन की वास्तविक सीमाओं और स्वामित्व से जुड़े विवाद को लेकर चिंता बढ़ गई है।
जमीन की कीमत बढ़ी तो गड़ गई नजर?
पार्षद का आरोप है कि क्षेत्र में जमीनों के दाम बढ़ने के साथ ही उनकी जमीन पर भी कुछ लोगों की नजर है। उन्होंने दावा किया कि इकबाल सिंह और अन्य लोग कथित तौर पर जमीन पर कब्जा करने की मंशा से लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के चलते वह मानसिक रूप से परेशान हैं। उनका कहना है कि जिस जमीन को उन्होंने वर्षों पहले वैध तरीके से खरीदा था, उसे सुरक्षित रखने के लिए अब उन्हें शासन-प्रशासन के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
एक साल से सीमांकन के लिए भटकने का दावा
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल जमीन के सीमांकन को लेकर उठ रहा है। सुनीता जगत के मुताबिक, वह लगभग एक साल से अपनी जमीन का सीमांकन कराने के लिए संबंधित अधिकारियों से गुहार लगा रही हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। उनका कहना है कि सीमांकन हो जाने से जमीन की वास्तविक सीमा स्पष्ट हो सकती है और विवाद की स्थिति में राहत मिल सकती है। इसके बावजूद उन्हें लगातार इंतजार करना पड़ रहा है।
भाजपा की सरकार, भाजपा की पार्षद और फिर भी परेशानी
इस पूरे मामले में राजनीतिक पहलू भी चर्चा का विषय है। सुनीता जगत भाजपा की पार्षद हैं और प्रदेश में भी भाजपा की सरकार है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब सत्तारूढ़ दल की एक जनप्रतिनिधि अपनी ही जमीन के सीमांकन के लिए लंबे समय से परेशान होने का दावा कर रही हैं, तो आम नागरिकों को अपनी जमीन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ती होगी? हालांकि, मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष और आरोपित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जमीन का नियमानुसार सीमांकन कराकर विवाद की स्थिति स्पष्ट करने के लिए क्या कदम उठाता है। सुनीता जगत को उम्मीद है कि उनकी शिकायत पर जल्द कार्रवाई होगी और वर्षों पहले खरीदी गई जमीन को लेकर बनी अनिश्चितता दूर होगी।
