
रमेश राजपूत
बिलासपुर – अच्छे व्यवहार, अनुशासन और बेहतर आचरण ने जेल की सलाखों के पीछे जीवन बिता रहे 21 कैदियों के लिए नई उम्मीद का रास्ता खोल दिया। बिलासपुर केंद्रीय जेल से आजीवन कारावास की सजा काट रहे 21 कैदियों को रिहा किया गया है। इनमें 20 पुरुष और एक महिला कैदी शामिल हैं। इन सभी ने जेल में करीब 14 साल या उससे अधिक समय बिताया है। जेल में उनके व्यवहार और आचरण को ध्यान में रखते हुए शासन स्तर पर उनकी रिहाई का निर्णय लिया गया। इस फैसले को कैदियों के जीवन में सुधार लाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
जेल डीजी की पहल से खुला रिहाई का रास्ता
केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने बताया कि छत्तीसगढ़ के जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता पिछले कुछ महीनों से लगातार बिलासपुर केंद्रीय जेल का दौरा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कैदियों से जुड़े विभिन्न मामलों पर गंभीरता से ध्यान दिया। साथ ही, कैदियों की मानसिक स्थिति, जेल में उनके व्यवहार और आचरण को समझने पर विशेष जोर दिया गया। जेल अधीक्षक के मुताबिक, डीजी हिमांशु गुप्ता ने ऐसे कैदियों को रिहा कर समाज की मुख्यधारा में दोबारा शामिल करने के लिए शासन स्तर पर पहल की, जिनका जेल में रहते हुए आचरण अच्छा रहा है और जिन्होंने अनुशासन का पालन किया है। इसी पहल के तहत 21 आजीवन कैदियों की रिहाई का रास्ता साफ हुआ।
अच्छे व्यवहार से दूसरे कैदियों को भी मिलेगी प्रेरणा

जेल से रिहा हुए कैदियों के लिए यह केवल सलाखों से बाहर आने का अवसर नहीं, बल्कि अपने जीवन को नए सिरे से शुरू करने की उम्मीद भी है। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब उन्हें समाज के बीच लौटकर सामान्य जीवन जीने का अवसर मिलेगा।इस पहल का उद्देश्य अन्य कैदियों को भी सकारात्मक व्यवहार और अनुशासन के लिए प्रेरित करना है। जेल प्रशासन की मंशा है कि कैदी अपने आचरण में सुधार लाएं और रिहाई के बाद जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज में अपनी जगह बनाएं।बिलासपुर केंद्रीय जेल से 21 आजीवन कैदियों की रिहाई ने यह संदेश दिया है कि सुधार, अनुशासन और अच्छे आचरण को महत्व देकर कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।
