
हरिशंकर पांडेय
बिलासपुर। आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव और बदलती जीवनशैली के बीच जूना बिलासपुर स्थित सत्संग भवन आज भी धार्मिक आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां पिछले तीन दशकों से सत्संग, भजन-कीर्तन और रामायण पाठ की परंपरा निरंतर जारी है। वर्ष 1996 में शुरू हुई इस धार्मिक पहल ने समय के साथ क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।गत दिनों सत्संग भवन में शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक रामायण पाठ एवं भजन संध्या का आयोजन किया गया। इस दौरान रेलवे क्षेत्र स्थित हनुमान मंदिर की निःशुल्क भजन मंडली ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी। रामायण की चौपाइयों और भक्तिमय गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम में सत्संग भवन के वरिष्ठ एवं वयोवृद्ध सदस्यों के साथ मोहल्ले के अनेक धर्मप्रेमी नागरिक शामिल हुए।

इस धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने में शिवप्रताप साव की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मल्हार, मस्तूरी और बिलासपुर क्षेत्र में दानशीलता एवं समाजसेवा के लिए प्रसिद्ध स्वर्गीय अमरनाथ साव के इकलौते सुपुत्र शिवप्रताप साव ने वर्ष 1996 में अपने स्थान पर सत्संग भवन की शुरुआत की थी। उनका उद्देश्य लोगों को धर्म, अध्यात्म और सद्भाव से जोड़ना रहा है। उनका मानना है कि धार्मिक गतिविधियों से मनुष्य के भीतर दया, करुणा, सेवा और परस्पर प्रेम की भावना विकसित होती है।सत्संग भवन में प्रतिदिन शाम 4:30 बजे से 5:30 बजे तक नियमित सत्संग आयोजित किया जाता है। इसमें श्रद्धालु एकत्रित होकर भजन-कीर्तन, रामायण पाठ और धार्मिक ग्रंथों का वाचन एवं श्रवण करते हैं। खास बात यह है कि उम्र के इस पड़ाव में भी वरिष्ठ सदस्य पूरे उत्साह के साथ इस परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं।सत्संग भवन का इतिहास संत-महात्माओं और आध्यात्मिक विभूतियों के सानिध्य से भी जुड़ा रहा है। समय-समय पर अनेक संतों ने यहां पहुंचकर प्रवचन दिए और अपने आध्यात्मिक विचारों से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। शिवप्रताप साव की धार्मिक आस्था और संत-महात्माओं के प्रति श्रद्धा के चलते जूना बिलासपुर सहित शहर के अनेक लोगों को संतों का सानिध्य प्राप्त करने का अवसर मिला।

यह सत्संग भवन केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सद्भाव, संस्कार और पीढ़ियों के बीच आपसी जुड़ाव का भी माध्यम बना हुआ है। बुजुर्गों के मार्गदर्शन में नई पीढ़ी तक धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को पहुंचाने का प्रयास यहां लगातार किया जा रहा है।बदलते समय में भी तीन दशकों से कायम यह धार्मिक परंपरा क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी है। जूना बिलासपुर के सत्संग भवन में रामायण पाठ और भजनों की गूंज न केवल सनातन संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखे हुए है, बल्कि समाज में सेवा, समर्पण और सद्भाव का संदेश भी दे रही है।