मस्तूरी

श्रीधाम गौधाम में बेजुबानों की दुर्दशा: बारिश में कीचड़ में धंसे पैर, चारा-पानी और शेड का अभाव, लगातार मौतें… कौन है जिम्मेदार?

उदय सिंह

बिलासपुर – मस्तूरी जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम जैतपुर में संचालित श्रीधाम गौधाम में मवेशियों की लगातार हो रही मौतों ने गौसेवा और सरकारी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौधाम की चारदीवारी के भीतर सैकड़ों मवेशी रखे गए हैं, लेकिन बारिश के इस मौसम में उनके लिए न तो पर्याप्त शेड की व्यवस्था दिखाई दे रही है और न ही चारा-पानी का समुचित इंतजाम। ऐसे में बेजुबान मवेशियों की हालत बद से बदतर होती जा रही है।

गौधाम के गेट के सामने खड़े मवेशियों की स्थिति देखकर ही वहां की व्यवस्थाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है। बारिश के कारण चारों ओर कीचड़ पसरा हुआ है और कई मवेशियों के पैर कीचड़ में आधे तक धंसे नजर आते हैं। खुले आसमान के नीचे खड़े मवेशियों को बारिश से बचने के लिए पर्याप्त आश्रय तक उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि अव्यवस्था के चलते लगातार मवेशियों की मौत हो रही है, लेकिन अब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने नहीं आया।

वहीं श्रीधाम गौधाम के अध्यक्ष मनीष मिश्रा के अनुसार, गौधाम में बीते सप्ताह भारी बारिश के कारण लीलागर नदी में आए बाढ़ के कारण लगभग 6 फिट पानी भर गया था जिसके कारण पूरा गौधाम कीचड़ से भर गया है और लगातार हो रही बारिश के साथ साथ आसपास के ग्रामों के मवेशियों को भी गौधाम में रखवा दिया गया है जिससे मवेशियों की संख्या 200 के पार पहुंच गई है जिसके कारण अब तक पिछले करीब एक महीने में लगभग 9 मवेशियों की मौत हो चुकी है। धीरे धीरे टीन सेड और दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था के लिए प्रयास किया जा रहा है। वही ग्रामीणों का दावा है कि मृत मवेशियों की संख्या इससे कहीं अधिक है और कई दर्जन मवेशियों की मौत हो चुकी है।

दोनों दावों के बीच वास्तविक संख्या भी जांच का विषय बन गई है। श्रीधाम गौधाम का संचालन फुलवारी शिक्षण एवं सेवा समिति, बहतराई द्वारा किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गौधाम के संचालन के लिए शासन की योजनाओं अथवा किसी मद से राशि उपलब्ध होती है, तो उसका उपयोग मवेशियों के लिए आवश्यक शेड, चारा, पानी और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं में होना चाहिए। लगातार मौतों के बावजूद जिम्मेदारों की कथित चुप्पी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल गौधाम का निरीक्षण कराने, मवेशियों की वास्तविक संख्या और मौतों की जांच कराने तथा बारिश से बचाव के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन बेजुबान मवेशियों की सुध कब लेता है और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाता है।

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