
उदय सिंह
बिलासपुर – शहर के मोपका स्थित शिव मेडिसिटी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान 55 वर्षीय महिला की मौत के बाद विवाद गहरा गया है। मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि निर्धारित मात्रा से अधिक इंजेक्शन दिए जाने के कारण महिला की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और संबंधित डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता की जांच करने की मांग की है। मिली जानकारी के अनुसार, त्रिपुरा से बिलासपुर घूमने आईं आनंदित भट्टाचार्य, पति शंकर भट्टाचार्य, पेट के हिस्से में कैंसर से पीड़ित थीं। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें 22 अक्टूबर की शाम शिव मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती होने के समय उनकी हालत ऐसी नहीं थी कि वह बातचीत भी न कर सकें। लेकिन रात करीब आठ बजे के बाद इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। अगले दिन 23 अक्टूबर की सुबह करीब सात बजे उनकी मौत हो गई।
दो घंटे के अंतराल में दो इंजेक्शन लगाने का आरोप
मृतका के भतीजे सुमित कुमार चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि महिला को करीब दो घंटे के अंतराल में दो बार इंजेक्शन लगाया गया। उनका दावा है कि निर्धारित एक एमएल की जगह 10 एमएल इंजेक्शन दिए जाने से महिला की हालत बिगड़ी। हालांकि, इंजेक्शन की वास्तविक मात्रा, दवा के प्रकार और मौत के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मेडिसिन चार्ट नहीं दिखाने का भी आरोप
परिजनों का आरोप है कि इलाज में इस्तेमाल की गई दवाओं और इंजेक्शन की जानकारी के लिए मेडिसिन चार्ट मांगा गया, लेकिन उन्हें चार्ट नहीं दिखाया गया। उन्होंने रात के समय आईसीयू में डॉक्टर की अनुपस्थिति का आरोप भी लगाया है। इसके अलावा, अस्पताल संचालक डॉ. संजय सिंह पर बदसलूकी करने और धमकी देने का आरोप लगाया गया है। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर इलाज में संभावित लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उसकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी थी। फिलहाल महिला की मौत के वास्तविक कारण और इंजेक्शन के ओवरडोज से मौत होने के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। मामले में जांच और चिकित्सकीय रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।