जांजगीर चाँपा

झोलाछाप डॉक्टर बंगाली की मनमानी, सील तोड़कर करने लगता है फिर ईलाज…. स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई भी बेअसर

जांजगीर चाँपा देवेंद्र निराला

जांजगीर चाम्पा – जैजैपुर विकासखण्ड अंतर्गत हसौद के फर्जी बंगाली डॉक्टर के क्लीनिक को 4 थीं बार सील किया गया है जो कि अपने आप में ही एक अनोखी बात है जो पूरे जिले में चर्चित हो गई है बंगाली क्लिनिक को केवल सील कर औपचारिकता निभा दी जाती है उसके खिलाफ नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई करने में अधिकारियों के पसीने छूट रहे है। बार बार बिना आदेश के सील क्लिनिक का ताला टूटना बंगाली के लिए कोई बड़ी बात नही है । ज्ञात हो कि 8 अगस्त 2019 को खंड चिकित्सा अधिकारी के द्वारा हसौद के बस स्टैंड पर स्थित बंगाली क्लीनिक को सील किया गया था , उसके उपरांत कुछ दिन बीतने के बाद ही बंगाली डॉक्टर दोबारा अपना क्लीनिक चला रहा था उसी बीच एक महिला का गर्भपात करने जैसा बंगाली डॉक्टर के ऊपर आरोप लगा जिसके कुछ दिन बाद फिर क्लीनिक को सील किया गया। लेकिन बंगाली के मंसूबे इतने बड़े थे कि इसके बावजूद भी वह क्लीनिक फिर से संचालित करने लगा जिसके बाद गांव के ही एक व्यक्ति के गलत इलाज के कारण मृत्यु हो गई, जिसकी रिपोर्ट मृतक की बेटी ने थाने में दर्ज कराई उसके बावजूद भी बंगाली क्लीनिक संचालित कर रहा था बाद में घर में इलाज करना शुरू किया जिस पर 22 नवंबर को बीएमओ की टीम घर में दबिश देकर 31 प्रकार की दवाईंयां जब्त की थी जिसमे प्रतिबंधित दवाई भी मिले थे,

लेकिन आज तक उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई नही हुई जिसका फायदा उठाते हुए बंगाली ने सील क्लिनिक का ताला बिना किसी आदेश के खुद तोड़ दिया। जिसकी सुचना सीएमएचओ को दी गई जिस पर उनके द्वारा जैजैपुर बीएमओ को तहसीलदार व थाना प्रभारी को साथ में लेकर जाँच कर बंगाली के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करने कहा गया था। 14 मार्च 2020 को जैजैपुर बीएमओ , थाना प्रभारी , तहसीलदार की टीम फिर से क्लीनिक में जाँच करने पहुंची जहाँ जाँच के दौरान ताला टूटा हुआ था, जिसे फिर से सील कर औपचारिकता निभा दी लेकिन अभी तक एफ आई आर दर्ज नही हुई। गौर करने वाली बात यह है कि आखिरकार स्वास्थ विभाग के अधिकारी फर्जी बंगाली डॉक्टर के ऊपर इतने मेहरबान कैसे हो सकते हैं जबकि क्लीनिक को इतनी बार सील किया गया फिर भी बंगाली डॉक्टर के ऊपर नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं किया गया जबकि नर्सिंग होम एक्ट के तहत भी एफ आई आर दर्ज करवाने का नियम है। कहीं ना कहीं यह तगड़ी सेटिंग को दर्शाता है। इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता ही निभाई जा रही है सूत्रों की मानें तो उच्च अधिकारी के बात को भी खंड चिकित्सा अधिकारी मानने को तैयार नहीं।

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