
उदय सिंह
बिलासपुर – स्कूल में साझेदारी और संचालन में वित्तीय अधिकार देने का भरोसा दिलाकर 15 लाख रुपये लेने के बाद राशि वापस नहीं करने का मामला सामने आया है। तखतपुर निवासी जनार्दन देवांगन ने माइंड्स आई इंटरनेशनल स्कूल, बरेला के संचालक अभय शर्मा पर छलपूर्वक रकम लेने, आपराधिक विश्वासभंग और षड्यंत्र का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक बिलासपुर से शिकायत की है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि मामले में दस्तावेज और लेन-देन के प्रमाण उपलब्ध कराने के बावजूद पुलिस कार्रवाई में टालमटोल कर रही है। इसको लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस पर आरोपियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार अभय शर्मा ने स्वयं को स्कूल का संचालक बताते हुए जनार्दन देवांगन को स्कूल के संचालन और विकास में साझेदारी का प्रस्ताव दिया था। आरोपी ने भरोसा दिलाया कि आर्थिक सहयोग के बाद स्कूल का संचालन संयुक्त रूप से होगा और उन्हें वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार भी मिलेंगे। इस भरोसे पर जनार्दन ने कुल 15 लाख रुपये दिए। इसमें छह लाख रुपये आरटीजीएस, तीन लाख रुपये फोनपे के माध्यम से और छह लाख रुपये नगद दिए जाने का उल्लेख शिकायत में किया गया है।
पार्टनरशिप डीड में रकम लेने का उल्लेख
शिकायतकर्ता के मुताबिक 16 जून 2025 को दोनों पक्षों के बीच पार्टनरशिप डीड भी निष्पादित हुई थी। इसमें 15 लाख रुपये प्राप्त करने का स्पष्ट उल्लेख था। इसके बाद भी शिकायतकर्ता को स्कूल के वित्तीय कार्यों से दूर रखा गया। स्कूल की फीस और अन्य आय का हिसाब-किताब नहीं दिया गया तथा साझेदारी के अधिकारों से भी वंचित रखा गया। मामला सामने आने के बाद 13 सितंबर 2025 को आरोपी अभय शर्मा द्वारा एक इकरारनामा किए जाने का भी दावा किया गया है। शिकायत के अनुसार इसमें अभय शर्मा ने 15 लाख रुपये प्राप्त करना स्वीकार करते हुए राशि 30 जून 2026 तक लौटाने की बात लिखी थी। समय सीमा बीतने के बाद भी राशि वापस नहीं की गई। बार-बार मांग करने पर कथित तौर पर टालमटोल की गई और बाद में रकम लौटाने से इनकार कर दिया गया।
पत्नी और स्कूल स्टाफ की भूमिका की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने अभय शर्मा की पत्नी नमिता शर्मा, स्कूल की प्राचार्य सृष्टि गुप्ता और उप-प्राचार्य सारिका कश्यप की भूमिका की भी जांच की मांग की है। उसका कहना है कि ये लोग स्कूल के संचालन और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले में उनकी भूमिका और कथित मिलीभगत की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं
जनार्दन देवांगन का आरोप है कि उसने पुलिस के समक्ष पार्टनरशिप डीड, रकम वापसी के इकरारनामे, बैंक लेन-देन, ऑनलाइन भुगतान और व्हाट्सएप चैट समेत अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं। इसके बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज कर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज होकर पीड़ित पक्ष ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पुलिस मामले को लगातार टाल रही है और आरोपियों को संरक्षण दे रही है। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच कर एफआईआर दर्ज करने, आरोपियों की भूमिका की जांच और 15 लाख रुपये की बरामदगी की मांग की है।