छत्तीसगढ़रतनपुर

खुटाघाट बांध से छोड़े गए पानी से मस्तूरी और बिल्हा क्षेत्र के तालाब हुए लबालब, गरमी तक के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में राहत ,अब भी खुटाघाट में 23% पानी शेष

अरपा नदी टेम्स भले ना बने लेकिन उससे भी जरूरी यह है कि यह बिलासपुर में भूगर्भ जल के स्तर को पहले की तरह सक्षम बनाए रखे

सत्याग्रह डेस्क

पिछले दिनों मस्तूरी और बिल्हा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों से आई मांग के बाद खुटाघाट से पानी छोड़ा गया था। दरअसल हर वर्ष गर्मी के मौसम में मस्तूरी और बिल्हा के तालाब पूरी तरह सूख जाते हैं। इन्हीं तालाबों पर ग्रामीणों की निस्तारी निर्भर करती है। लिहाजा जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार पानी की मांग की जा रही थी। जिसके बाद खारंग जल संसाधन विभाग ने पानी छोड़ने का निर्णय लिया। उस वक्त बाद में करीब 37% जलभराव था। पानी छोड़ने के 15 दिन बाद पानी टेल एरिया तक पहुंचा और रास्ते के लगभग सभी तालाब पूरी तरह भर चुके हैं ।हालांकि इसके बाद भी उन तालाबों तक नहर का पानी नहीं पहुंच पाया है जिसकी दूरी नहर से अधिक थी। इसके बाद भी बिल्हा और मस्तूरी क्षेत्र के अधिकांश गांव में कम से कम गर्मी के मौसम की व्यवस्था तो हो गई है। जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है वैसे पानी छोड़ने के दौरान ही जल संसाधन विभाग ने आदेश जारी किया था कि कोई भी किसान इस पानी का दुरुपयोग सिंचाई के लिए नहीं करेगा । जल संसाधन विभाग के अनुसार करीब 268 गांव के तालाबों को खूंटाघाट बांध के पानी से भर दिया गया है, लेकिन अब भी कुछ गांव ऐसे हैं ,जहां के तालाब सुखे हैं और जिनके लिए पानी की लगातार मांग आ रही है। जल संसाधन विभाग का दावा है कि अभी बांध में 23% जलभराव है और बांध 10% अतिरिक्त जल उपलब्ध कराने की स्थिति में है। इसलिए आने वाले दिनों में अगर पानी की आवश्यकता हुई तो खुटाघाट बांध आपूर्ति करने को तैयार है।

वहीं लगातार जल संकट से गुजर रहे इस क्षेत्र को भविष्य के लिए भी सोचना होगा । जल संचय की प्रवृत्ति आम आदमी में बढ़ानी होगी । बरसात के मौसम में पूरे क्षेत्र में अच्छी खासी बारिश होती है । अगर हम उस पानी को रोकने में सक्षम हुए तो फिर इस मौजूदा जल संकट से निपट सकते हैं। आने वाले वर्षों में खूंटाघाट बांध से ही बिलासपुर में भी जलापूर्ति होनी है । ऐसे में जल संकट का गहराना संभव है। लिहाजा सभी स्तरों पर अभी से प्रयास करने होंगे क्योंकि साल दर साल भूगर्भ जल में कमी आ रही है और ऐसा शहर और ग्रामीण दोनों इलाकों में हो रहा है। केवल वाटर हार्वेस्टिंग से यह समस्या दूर नहीं हो सकती। इसके लिए बड़े-बड़े कुंड और तालाब बनाने होंगे ,जहां पानी को संचय करना होगा । बिलासपुर में अरपा नदी में भी वर्षभर पानी ठहरा रहे यह सुनिश्चित करने के साथ यह प्रयास भी करना होगा कि यह पानी धीरे धीरे जमीन के भीतर भी पहुंचे। अरपा नदी टेम्स भले ना बने लेकिन उससे भी जरूरी यह है कि यह बिलासपुर में भूगर्भ जल के स्तर को पहले की तरह सक्षम बनाए रखे।

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