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नियम भंग करने वालों को बचाने की साजिश ,देवरीखुर्द सरपंच पर क्यों नहीं हो रही कार्यवाही ?

इसे लेकर यहां गहरा जन आक्रोश देखा जा सकता है ,यह अलग बात है कि जिम्मेदार अधिकारियों को यह सब दिखाई नहीं पड़ता

सत्याग्रह

चुनाव के दौरान राजनीतिक दल या सत्ता में काबिज संगठन से जुड़े लोग सरकारी मद का उपयोग कर मतदाताओं को प्रभावित ना करें इस लिहाज से चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा आदर्श आचार संहिता लागू की जाती है और दावा किया जाता है की आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी, लेकिन लगता है ऐसे दावे सिर्फ फाइलों में ही सिमट कर रह गए हैं ,क्योंकि देवरीखुर्द में बहुचर्चित सड़क निर्माण मामले में अब तक दोषियों के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही तो दूर जनपद सीईओ यह बता रहे हैं कि उन्हें ऐसे किसी मामले की कोई जानकारी ही नहीं है ।

आपको याद दिलाना होगा कि इस बार विधानसभा चुनाव में 26 नवंबर से 11 दिसंबर तक आदर्श आचार संहिता लागू थी, जिस दौरान जनप्रतिनिधियों द्वारा किसी भी प्रकार के भूमि पूजन और लोकार्पण आदि करने पर स्पष्ट रोक लगी हुई थी, लेकिन इसी दौरान देवरीखुर्द की सरपंच भारती पंकज परते, उपसरपंच ब्रह्मदेव सिंह ठाकुर और अन्य जनप्रतिनिधियों ने बाकायदा समारोह आयोजित कर सीसी रोड निर्माण के लिए भूमि पूजन किया। देवरीखुर्द में मुख्यमंत्री ग्राम गौरव पथ योजना के अंतर्गत 90 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड निर्माण किया जाना था लेकिन आदर्श आचार संहिता लागू हो जाने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि चुनाव परिणामों के बाद ही इस पर काम शुरू होगा ,किंतु आदर्श आचार संहिता को ठेंगा दिखाते हुए देवरीखुर्द की सरपंच और उनके सहयोगियों ने बाकायदा सीसी रोड बनाने के लिए भूमि पूजन करवा दिया। नियमों का उल्लंघन करते पाए जाने पर देवरीखुर्द के कुछ नागरिकों ने सरपंच के खिलाफ तत्कालीन कलेक्टर पी दयानंद से शिकायत कर मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की थी। शिकायत करने वालों में युगल किशोर झा और बिरजू राव का कहना है कि लंबा वक्त बीत जाने के बावजूद अब तक दोषियों के खिलाफ ना तो कोई जांच हुई है और नहीं उन पर किसी तरह की कोई कार्यवाही ही गई है । हैरानी तो उस वक्त हुई जब बिल्हा के सीईओ ऐस एन मिश्रा ने यह कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी ही नहीं है ,जबकि बिल्हा सीईओ एसएन मिश्रा उस समय भी बिल्हा में ही पदस्थ थे और पूरा मामला उनकी जानकारी में था उनकी जानकारी में ही जांच को लेकर पंचायत इंस्पेक्टर की नियुक्ति भी हुई थी, इसलिए उनके बदले हुए रूप को देखकर साफ समझा जा सकता है कि मामले में बड़े पैमाने पर घालमेल हुआ है और अधिकारी सेट हो चुके हैं तभी तो इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने की साजिश की जा रही है । देवरीखुर्द ग्राम पंचायत के नागरिकों का आरोप है कि यहां सरपंच और पंचायत की मनमानी हर स्तर पर जारी है। कभी शौचालय तो कभी आवास को लेकर लगातार शिकायत आ रही है। कुछ लोगों का समूह अपनी मनमानी पर उतर आया है नागरिकों की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पंचायती राज, जंगलराज में तब्दील हो चुका है । इसे लेकर यहां गहरा जन आक्रोश देखा जा सकता है ,यह अलग बात है कि जिम्मेदार अधिकारियों को यह सब दिखाई नहीं पड़ता।

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