
आत्मदाह की कोशिश कर ग्रामीण लेख राम साहू ने खुद को कटघरे में खड़ा कर लिया है और अब उन्हें हवालात की हवा खानी पड़ रही है
बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
बिल्हा विकासखंड के ग्राम मदनपुर से करीब 20 ग्रामीण कलेक्टर से मुलाकात करने पहुंचे थे लेकिन चुनावी व्यस्तताओं की वजह से जब कलेक्टर से मुलाकात ना हो पाई तो हताश- निराश ग्रामीणों में से एक, लेख राम साहू अपने ऊपर मिट्टी तेल डाल आत्मदाह की धमकी देने लगा। आत्मदाह की कोशिश करते लेख राम साहू को वहां मौजूद लोगों के साथ पुलिस ने ऐसा करने से रोका और उसे हिरासत में लिया उसके पास मौजूद करीब 2 लीटर मिट्टी तेल से भरे कंटेनर को भी पुलिस ने जप्त कर लिया। मामला अनोखा भी है और दिलचस्प भी। ग्रामीण सामूहिक आत्महत्या की इजाजत मांग रहे हैं क्योंकि उनके गांव के सरपंच ने पौने दो करोड़ रुपए का घोटाला किया है। बात शायद आपके गले नहीं उतरी होगी। अगर कोई सरपंच घोटाला करें तो उसे कानून सजा दिलाने की कोशिश होनी चाहिए। लेकिन प्रशासन को मजबूर करने इस तरह के कदम उठाने को किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता। ग्रामीणों के आरोपों को अगर सच माने तो मदनपुर के सरपंच द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा घालमेल किया गया है ।योजना के तहत प्राप्त पौने दो करोड़ रुपए का गबन कर सरपंच ने रकम अपने खाते में जमा करा लिया। जिस वजह से पिछले 3 साल से 165 मकान अधूरे पड़े हैं ।सरपंच ने जालसाजी करते हुए निर्माण सामग्री की सप्लाई कागजों में दिखा दी। मदनपुर के लिए आवास साल 2015 16 में स्वीकृत हुए थे। सरपंच द्वारा बैंक खाता खोलने के नाम पर ग्रामीणों से हस्ताक्षर लिए गए और उनके आवास के लिए प्राप्त रकम को आयुष ट्रेडर्स, मान्या ट्रेडर्स और निधि कंस्ट्रक्शन के नाम से फर्जी फॉर्म बनाकर राशि को इन खातों में ट्रांसफर कर दिया गया ।पिछले 3 सालों में गांव में 10 या 15 आवास ही बन पाए हैं। ग्रामीणों ने 500 से अधिक शौचालय अपने खर्च पर बनवा लिए हैं, लेकिन उनको, इसकी राशि भी प्राप्त नहीं हुई। इस मामले में लंबे वक्त से जनपद पंचायत से लेकर कलेक्टर तक शिकायत की जा चुकी है लेकिन आरोपी पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं हो रही। ऊंची पहुंच और रसूख रखने वाले के खिलाफ आज तक एफ आई आर तक दर्ज ना होना बताता है कि उसकी पहुंच कहां तक है। लिहाजा प्रशासन की आंखें खोलने सोमवार को 2 दर्जन से अधिक ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और आत्मदाह का प्रयास कर ध्यान अपनी मांग की ओर खींचा, लेकिन कलेक्ट्रेट में आत्मदाह करने के इस सार्वजनिक कोशिश से हंगामा मच गया। ग्रामीणों ने तो यहां तक आरोप लगा दिया कि उनके पहुंचने की सूचना रतनपुर पुलिस ने सिविल लाइन पुलिस को दे दी थी इसीलिए कोई कदम उठाने से पहले ही उन्हें रोक दिया गया ।ये मामला पुराना है और कई बार मीडिया में भी यह खबर आ चुकी है, लेकिन लोकसभा चुनाव के पहले इस मुद्दे को इस स्तर पर उठाना राजनीति से भी प्रेरित हो सकता है ।इसलिए पुलिस और प्रशासन को चाहिए कि मामले की निष्पक्ष जांच कराएं और जो भी दोषी हो उसके खिलाफ उचित कार्यवाही करें लेकिन कलेक्ट्रेट में आत्मदाह की कोशिश कर ग्रामीण लेख राम साहू ने खुद को कटघरे में खड़ा कर लिया है और अब उन्हें हवालात की हवा खानी पड़ रही है। कभी कभी ज्यादा नेतागिरी भी भारी पड़ जाती है ,ऐसा ही लेख राम साहू के साथ हुआ।