
उदय सिंह
बिलासपुर – जिले के मस्तूरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भिलाई में मनरेगा मजदूरी भुगतान को लेकर सामने आए कथित भ्रष्टाचार के मामले ने तूल पकड़ लिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत स्वीकृत आवासों से जुड़े हितग्राहियों ने 27 जनवरी, मंगलवार को एक बार फिर जनपद पंचायत मस्तूरी पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई और निष्पक्ष जांच व त्वरित कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के अंतर्गत किए गए श्रम की मजदूरी राशि वास्तविक हितग्राहियों को न देकर गांव के अन्य व्यक्तियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई। शिकायत के अनुसार ग्राम भिलाई में समारू मानिकपुरी, जयन्ती लाल निर्मलकर, आशा देवांगन, प्रीतम लाल निर्मलकर सहित कई हितग्राहियों के प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए थे। आवास निर्माण की विभिन्न किस्तों की राशि तो जारी हुई, लेकिन मनरेगा के तहत मिलने वाली मजदूरी की रकम आज तक हितग्राहियों को नहीं मिली। पीड़ितों ने बताया कि प्रत्येक हितग्राही को लगभग 23,490 रुपये मजदूरी मिलनी थी, जिसे रोजगार सहायक द्वारा कथित रूप से अन्य लोगों के खातों में डलवाया गया। आरोप है कि यह राशि योगेश, अन्नपूर्णा, गणेश बाई, माधव कुमार, भगवती सहित अन्य व्यक्तियों के खातों में भेजी गई, जिनका संबंधित आवास निर्माण से कोई संबंध नहीं है।

कई हितग्राहियों की रकम मिलाकर लाखों रुपये के गबन की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरी भुगतान न होने के कारण उनका आवास निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है और उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। पहले पंचायत स्तर पर और फिर जिला कलेक्टर को शिकायत करने के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तब मजबूर होकर उन्होंने 27 जनवरी को जनपद पंचायत मस्तूरी में दोबारा शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित हितग्राहियों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बाद पंचायत से जुड़े कुछ तथाकथित लोग उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं और पैसे लौटाने का झांसा देकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों ने जनपद पंचायत प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, दोषी रोजगार सहायक व संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई तथा बकाया मजदूरी राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की है। वही उन्होंने इस मामले में शीघ्रता से कार्रवाई नही होने पर मुख्यमंत्री से भी शिकायत करने की जानकारी दी है।