
रमेश राजपूत
जांजगीर-चांपा – छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित पोराबाई नकल कांड में जिला न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 12वीं बोर्ड परीक्षा की टॉपर रही पोराबाई सहित चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने सभी दोषियों को 5-5 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5-5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2008 में आयोजित 12वीं बोर्ड परीक्षा में पोराबाई ने प्रदेश में टॉप करते हुए 500 में से 484 अंक प्राप्त किए थे।

टॉप रिजल्ट को लेकर संदेह उत्पन्न होने पर मामले की जांच कराई गई, जिसमें उत्तर पुस्तिका की लिखावट पोराबाई की वास्तविक लिखावट से मेल नहीं खाई। जांच में नकल और उत्तर पुस्तिका में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर बम्हनीडीह थाना में अपराध दर्ज किया गया था। इसके बाद प्रकरण का चालान जेएमएफसी चांपा न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां पोराबाई सहित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई। मामले की सुनवाई के दौरान वर्ष 2020 में निचली अदालत से आरोपियों को राहत मिली थी, लेकिन अभियोजन पक्ष द्वारा इस निर्णय के विरुद्ध अपील की गई।

अपील पर द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गणेश राम पटेल की अदालत में विस्तृत सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद न्यायालय ने पोराबाई, फुलसाय नृसिंह, एस.एल. जाटव एवं दीपक जाटव को दोषी मानते हुए कठोर सजा सुनाई। न्यायालय ने अपने फैसले में विशेष टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपियों ने केवल माध्यमिक शिक्षा मंडल के साथ ही नहीं, बल्कि उन हजारों विद्यार्थियों के साथ भी अन्याय किया है जो अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए ईमानदारी से कड़ी मेहनत करते हैं। फैसले के बाद सभी दोषियों को जेल दाखिल कर दिया गया है। यह निर्णय शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।