बिलासपुर

सत्याग्रह की खबर पर लगी मुहर: मोपका के जंगल में अवैध उत्खनन और पेड़ो की कटाई पर जागा वन विभाग…जांच के आदेश जारी,

भुवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर – एक बार फिर सत्याग्रह न्यूज के खबर का असर हुआ है। जहाँ बिलासपुर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले मोपका के जंगल में हो रहे अवैध खनन और अंधाधुन पेड़ो की कटाई के मामले में वन विभाग द्वारा जांच शुरू कर दी गई है। आपको बता दे कि जिला प्रशासन के नाक के नीचे हो रहे हरे भरे जंगल के दोहन के मामले में सत्याग्रह न्यूज की टीम ने मौके पर पहुंच वास्तविक स्थिति को प्रमुखता से न्यूज के माध्यम प्रसारित किया था। जिसके चंद घंटों में ही खबर पर मुहर लगाते हुए रेंजर ने परिक्षेत्र सहायक अधिकारी को जांच के आदेश जारी किए है। जिसमे तीन दिनों के भीतर उक्त मामले की जांच कर रिपोर्ट देने कहा गया है। आपको बता दे कि न्यायधानी में मोपका के खसरा नं 2500, और 53,54,55 में 80 एकड़ के आसपास की वन विभाग की जमीन है। जहा बीते कई वर्षो से अवैध मिट्टी का खनन और पेड़ों की अंधा धुन कटाई की गई है।

जो वर्तमान में अनवरत जारी है। इधर मामले में वन विभाग के अमले ने जांच की पहल तो कर दी गई है। लेकिन अब देखना होगा कि इस जांच कि आच कहा तक पहुंच पाती है। इस पूरे मामले में उठ रहे सवालों का जवाब कितना सही मिलता है यह तो आने वाले दिनों में साफ हो सकेगा! फिलहाल बेजुबान पेड़ो की बलि चढ़ाने वाले दोषियों और धरती का सीना छल्ली करने वाले खनिज माफियाओं पर कड़ी कार्यवाही की मांग अंचल के लोग कर रहे है।

इस खबर का हुआ असर…

न्यायधानी में वन विभाग की जमीन पर अवैध खनन और हरे-भरे पेड़ों की बलि…खनिज माफिया चला रहे कारोबार, मोपका के जंगल का अस्तित्व खतरे में,

बिलासपुर – जिला मुख्यालय से चंद किलोमीटर दूर मोपका में भू माफिया धरती का सीना छल्ली कर वनोपज भूमि से मिट्टी का अवैध परिवहन कर रहे है। मनमर्जी का आलम यू है कि सागौन पेड़ो की अब तक इतनी बली दी जा चुकी है कि बिलासपुर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले मोपका बीट नंबर ए और बी में गनती के ही सागौन पेड़ बचे है। मिली जानकारी के अनुसार मोपका के खसरा नं 2500, और 53,54,55 में 80 एकड़ के आसपास की वन विभाग की जमीन है। जहा बीते कई वर्षो से अवैध मिट्टी का खनन और पेड़ों की अंधा धुन कटाई की जा रही है जो वर्तमान में अनवरत जारी है। ताज्जुब की बात यह है कि करीब 80 एकड़ में फैले इस जंगल में कोई बीट गार्ड कि तैनाती नही है। जिला मुख्यालय से चंद किलोमीटर दूर स्थित इस जंगल में कोई अधिकारी झांकने तक नही पहुंचते है। जिसका फायदा भू माफिया प्रवृत्ति के लोग उठा रहे है। सूत्रों की माने तो वर्तमान में जेसीबी से रोजाना सैकड़ो फिट रेतीली मिट्टी कि खोदाई की जा रही है। यही नहीं खोदाई के दौरान बीच में आने वाले पेड़ो को भी काटा जा रहा है। इस मामले में पूर्व में तैनात गार्ड रामनारायण धुरी ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2013 – 14 में मोपका के बीट नंबर ए और बी हजारों की संख्या में वृक्षारोपण किया गया था जिसमें हजारों की संख्या में सागौन पेड़ों को रोपा गया था। जिनकी सुरक्षा के लिए रामनारायण धुरी, बुद्धेश्वर, राजकुमार जय कुमार सहित 4 लोगों जिम्मेदारी दी गई थी जिसे उनके द्वारा निभाया भी गया लेकिन बीते 2 वर्ष में उनके कंपनी से अनुबंध खत्म होने का हवाला देकर वन विभाग के अधिकारियों ने वनों की सुरक्षा करने वाले गार्ड से अपना मुंह फेर लिया। लिहाजा भू माफियाओं को वन भूमि को लूटने का खुला नेवता मिला। जिसके बाद बिना रोक टोक के माफियों ने वन भूमि का दोहन करने का खेल शुरू कर दिया। जहां कुछ वर्षो में ही सैकड़ो की संख्या में सागौन पेड़ काटे दिए गए तो वही लाखों क्यूबिक़ फिट मिट्टी का खनन कर दिया गया। इसके बाद भी वन विभाग के दफ्तर में एसी में आराम फरमाने वाले अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगी या यूं कहे उनके नाक के नीच से यह सारा खेल चलता रहा और जिम्मेदार अपने आंख मूंद लिए। जिस तरह से वन उपज भूमि का दोहन किया जा रहा है। ऐसे में वो दिन दूर नही जब मोपका के वन बीट ए और बी को खोदा जंगल के नाम से जाना जाएगा।

बीट गार्ड की नियुक्ति को लेकर सवालों के कटघरे में वन विभाग,, बेस कीमती वनों की रक्षा भगवान भरोसे..?

मोपका के वन भूमि कि रक्षा में तैनात गार्ड रामनारायण धुरी ने बताया कि मोपका के करीब 80 एकड़ में फैले वन भूमि में कोई बीट गार्ड की नियुक्ति नही हुई है। शहर से लगे इस बेस कीमती वन भूमि को लावारिश हालत में छोड़ दिया गया है। जबकि वनों की रक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग की है। लेकिन इस मामले में वन विभाग के अधिकारी सजगता दिखाना तो दूर गार्ड की नियुक्ति तक करने की जरूरत नहीं समझे है। रामनारायण धुरी ने बताया कि वो विगत तो वर्षो से वन विभाग के अधिकारियों के चक्कर लगा रहे है। जिनके द्वारा ना तो उनको 24 महीनो का वेतन का भुगतान किया गया है। और ना ही वन भूमि की रक्षा करने उनकी नियुक्ति की गई है। इसके बाद भी अपना पूरा जीवन जंगल की सुरक्षा में बिताने वाले रामनारायण धुरी ने मोपका के जंगल के दोहन की जानकारी वन विभाग को दी है। जिसके बाद भी एसी रुम का मोह नहीं छोड़ने वाले अधिकारियों ने इस और कोई ध्यान नहीं दिया। जिसका खामियाजा मोपका के खामोश जंगल को उठाना पड़ रहा है। जो अब अपने अस्तित्व को बचाने की गुहार लगाने मजबूर है।

मोपका के जंगल से लगे जमीनों में चला रहा ईट भट्ठा,, जंगल के दोहन में उनकी भूमिका भी संदिग्ध…

मोपका में फैले जंगल से लगे जमीनों में करीब 5 ईट भट्ठे संचालित है। जहा से जंगलों तक जाने अस्थाई रास्ता बनाया गया है जो बड़े बड़े वाहनों के आवाजाही के लिए उपयोग में लाएं जाते है। सूत्रों की माने तो जंगलों का दोहन कर इन्ही ईट भट्टो में खनिज संसाधनो को उपयोग में लाया जा रहा है। तभी तो जंगल की लाखो क्यूबिक़ फिट मिट्टी और पेड़ के दोहन होने की भनक जिला प्रशासन को नही लगी। सूत्र बताते है कि यहां संचालित सभी ईट भट्ठे के संचालन करने वाले लोगो की पहुंच सत्ताधारी नेताओ और कुछ जगहों में इनकी हिस्सेदारी भी है। तभी तो आज तक इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की गई है। ऐसे में वन विभाग का अमला अगर मामले में निष्पक्ष जांच करता है तो निश्चित तौर पर वन भूमि के दोहन के मामले में बड़ा खुलासा हो सकेगा।

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