मल्हार

कोरोना वारियर्स की राशि भुगतान करने में नगर पंचायत मल्हार फैल,, आर्थिक समस्या से जूझ रहे रसोईया और व्यापारियों ने जिला कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

उदय सिंह

मस्तूरी -कोरोना काल मे मैदानी स्तर पर कोरोना वारियर की भूमिका निभाने वाले रसोइयों को सम्मानित करने के बजाए उन्हें दुत्कार ने वाले सीएमओ राधाचरण तिवारी की शिकायत सोमवार को जिला कलेक्टर से की गई है। वैसे तो कोरोना के दंश से समूचे प्रदेश अब तक उबर नहीं सका है लेकिन कोरोना के पहले और दूसरे वेब से जो तबाही देश अपितु जिले में हुआ है उसे कतई ही नकारा नहीं जा सकता, इस बीच मौत के साये में मल्हार के रसोईया एवं व्यपारी नगर पंचायत मल्हार मे मंगल भवन , नवोदय विद्यालय , मध्य नगरी उ.मा. विद्यालय आदि मे प्रवासी मजदूरो की सेवा में लगे थे।

जिनमे सभी ने आपात स्थिति के मद्देनजर आर्थिक और श्रमिक रूप से अपना योगदान दिया। जिसके बलबूते ही मल्हार से क्वॉरेंटाइन सेंटरों से सैकड़ों की संख्या में लोगो की जान बचाई जा सकी, इस महत्वपूर्ण योगदान को लेकर नगर पंचायत मल्हार में व्यवसायियों और रसोइयों को किसी भी के माध्यम सम्मानित करना तो दूर उक्त राहत कार्य में खर्च होने वाली राशि के साथ रसोइयों को मिलने वाले मानदेय का भुगतान भी अब तक नही किया गया है। जिस वजह से उनके समक्ष आर्थिक समस्या आन खड़ी हुई है इसको लेकर मल्हार नगर पंचायत कार्यालय के आला अफसरों के साथ ही सत्ता में आसीन जनप्रतिनिधि की प्रतिक्रिया संदेहास्पद दिखाई दे रही है। क्योंकि राशि केे भुगतान हेतु रसोइयोंं और व्यवसायियों द्वारा सी एम ओ से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी इस ओर ध्यान नही दे रहे है।

उल्टा उन्हें नगर पंचायत कार्यालय से दुर्व्यवहार कर भगा देते है। जिससे आहत होकर सभी व्यपारी एवं काम करने वाले रसोइए दर्जनों की संख्या में कलेक्ट्रेट पहुँच ज्ञापन सौंपा है। और उचित कार्यवाही करने जिला कलेक्टर सारांश मित्तर से न्याय की गुहार लगाई है। सूत्रों की माने तो मल्हार नगर पंचायत में पदस्थ सीएमओ राधाचरण तिवारी की मनमानी चरम पर है। कुर्सी के घमंड में चूर सीएमओ को भले ही शासन ने आम जनता की सेवा के लिए बिठाया है। लेकिन वह आम जनता की सेवा के बजाय खुद में मगन रहते हैं मानो जैसे जनता की समस्या से उनका कोई भी सर्वोकार नहीं हो। कहते है। ना अति का अंत होता है..! ऐसे में देखना होगा कि क्या जिला प्रशासन के प्रशासक उक्त मामले में क्या कार्यवाही करते है।

लाखो की राशि कही हजम तो नही हो गई..?

लॉक डाउन के समय मल्हार के क्वॉरेंटाइन सेंटरों में आने वाले प्रवासी मजदूर के साथ-साथ स्थानीय लोगों के रुकने नाश्ता , चाय भोजन की व्यवस्था के साथ साथ सब्जी आपूर्ती करने वाले, टेंट हाऊस वाले एवं हार्डवेयर दुकान से ब्लीचिंग पाऊडर पंखा आदि रसोई बनाने हेतु गैस सिलेण्डर एवं राशन सामानो का सभी को मिलाकर लगभग 5 लाख से अधिक राशि खर्च की गई है। जिसके भुगतान को लेकर पिछले दो सालों व्यपारी रोजना नगर पंचायत के चक्कर काट रहे है। ऐसे में जानकरों में यह आशंका जताई है। कि उक्त राशि को नगर पंचायत स्तर पर हजम कर लिया गया है। भुगतान को लेकर इतनी लेटलतीफी होने से उक्त मामले में धांधली की संभावना बढ़ गई है हालांकि इसकी विभागीय पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।

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