
उदय सिंह
रायपुर – जीवन बीमा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने और वित्तीय सुरक्षा का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने छत्तीसगढ़ में ‘बीमा की बात’ अभियान की शुरुआत की है। रायपुर से विशेष जागरूकता कैंटर वैन को रवाना किया गया, जो प्रदेश के सभी 33 जिलों में पहुंचकर लोगों को जीवन बीमा के महत्व की जानकारी देगी। यह पहल भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ विजन के अनुरूप शुरू की गई है।

आईआरडीएआई की राज्य बीमा योजना के तहत छत्तीसगढ़ में जीवन बीमा के लिए लीड इंश्योरर की जिम्मेदारी निभा रही एसबीआई लाइफ इस अभियान के माध्यम से लोगों को वित्तीय सुरक्षा के प्रति जागरूक करेगी। कैंटर वैन में एलईडी स्क्रीन के जरिए ऑडियो-विजुअल सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। साथ ही, स्थानीय छत्तीसगढ़ी भाषा और संवादात्मक माध्यमों से बीमा संबंधी जानकारी को सरल और सहज तरीके से समझाया जाएगा।

अभियान का विशेष जोर ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों तक पहुंच बनाने पर रहेगा।आईआरडीएआई की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार, भारत में बीमा की पहुंच 3.7 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक औसत 7.3 प्रतिशत है। वहीं, जीवन बीमा की पहुंच 2.8 प्रतिशत से घटकर 2.7 प्रतिशत रह गई है। ये आंकड़े आम लोगों तक बीमा संबंधी जानकारी पहुंचाने और वित्तीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के पश्चिम क्षेत्र के जोनल डायरेक्टर राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि जीवन बीमा परिवार के भविष्य को सुरक्षित रखने और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि ‘बीमा की बात’ पहल के जरिए लोगों को उनकी रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर वित्तीय सुरक्षा का महत्व समझाने का प्रयास किया जाएगा। यह पहल आईआरडीएआई के राष्ट्रीय विजन को आगे बढ़ाने की कंपनी की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग के विशेष सचिव ऋषभ कुमार परासर, एडिशनल डायरेक्टर अंकित मोदी और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के भोपाल के रीजनल डायरेक्टर अमित कुमार साहा सहित अन्य गणमान्य अतिथि इस अवसर पर उपस्थित रहे।

एसबीआई लाइफ के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य लोगों को जीवन बीमा के बारे में बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना, परिवार की आर्थिक सुरक्षा के महत्व को समझाना और उन्हें अपने भविष्य से जुड़े वित्तीय फैसले सोच-समझकर लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।