
हरिशंकर पांडेय
मल्हार – लगातार बारिश और सर्द हवाओं के चलते नगर के अस्थायी पशु बाड़े में रखे मवेशियों की हालत बिगड़ने लगी है। इनमें से सात मवेशियों की स्थिति अधिक गंभीर होने पर उन्हें मां डिडिनेश्वरी मंदिर परिसर में रखकर विशेष उपचार दिया जा रहा है। वहीं, अन्य मवेशियों को बारिश और ठंड से बचाने के लिए मंगल भवन के शेड में सुरक्षित रखा गया है। पशु चिकित्सा विभाग की टीम और स्थानीय युवा मिलकर मवेशियों की देखभाल में जुटे हुए हैं।

दरअसल, धान की फसल को मवेशियों से बचाने के उद्देश्य से पिछले तीन महीनों से मंदिर के पास अस्थायी बाड़ा बनाकर सैकड़ों मवेशियों को रखा गया है। पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश और ठंडी हवाओं के कारण कई मवेशी बीमार पड़ने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय युवाओं ने मोर्चा संभाला और बीमार मवेशियों के उपचार की व्यवस्था कराई।
पशु चिकित्सा विभाग की टीम कर रही निगरानी
मवेशियों के उपचार एवं देखभाल के लिए मस्तूरी से पहुंची पशु चिकित्सा विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है। टीम में डॉ. आर.बी. चौरसिया, अतिरिक्त उपसंचालक एवं प्रभारी, कृत्रिम गर्भाधान केंद्र मस्तूरी तथा अजय प्रसाद पटेल, सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी शामिल हैं। ओमप्रकाश मिश्रा और जितेंद्र यादव भी देखभाल में सहयोग कर रहे हैं। बीमार मवेशियों को ड्रिप और इंजेक्शन के माध्यम से उपचार दिया जा रहा है।
स्थानीय युवाओं ने भी संभाली जिम्मेदारी..
मुश्किल की इस घड़ी में नगर पंचायत मल्हार के स्थानीय युवा राजू गणेश दत्त तिवारी, आकांक्षा कुमारी, सूरज सिंह, अविनाश मिश्रा, सहित अन्य युवा मवेशियों की सेवा में जुटे हैं। युवाओं ने बीमार मवेशियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ ही ठंड से बचाव के लिए अलाव और सेंकाई की व्यवस्था की है। उनके प्रयासों से मवेशियों को राहत पहुंचाने का काम किया जा रहा है।
मवेशियों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं, गोठान और गौधाम योजनाओं पर उठ रहे सवाल…..

शासन और प्रशासन भले ही मवेशियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए प्रतिबद्धता जताते हों, लेकिन ग्रामीण अंचलों की जमीनी हकीकत इससे अलग तस्वीर बयां करती है। आज भी बेजुबान मवेशी सुरक्षित आश्रय, पर्याप्त चारा और समुचित उपचार के अभाव में दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ऐसे हालात में गोठान और गौधाम जैसी योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठना लाजिमी है। आए दिन मवेशियों की भूख, बीमारी और उचित देखभाल के अभाव में मौत की खबरें सामने आती हैं, इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान अब तक नजर नहीं आता।
धान की फसल लगते ही बढ़ जाती है मवेशियों की मुसीबत,
मल्हार में हर वर्ष धान की फसल लगने के बाद मवेशियों की समस्या गंभीर हो जाती है। किसान अपनी फसल को नुकसान से बचाने के लिए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाते हैं, लेकिन उन्हें स्थायी समाधान नहीं मिल पाता। ऐसे में किसान और आम नागरिक मिलकर मवेशियों के लिए अस्थायी बाड़े की व्यवस्था करते हैं। हालांकि, पर्याप्त संसाधनों, सुरक्षित आश्रय, चारे और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में इन बेजुबानों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी रहती है।
अस्थायी इंतजाम से कब तक बचेगी बेजुबानों की जान….
मौसम की मार पड़ते ही अस्थायी बाड़ों में रखे मवेशियों की परेशानी और बढ़ जाती है। बारिश, ठंड और बीमारियों से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने पर उनकी हालत गंभीर हो जाती है। मल्हार में हाल ही में बीमार मवेशियों के उपचार और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखने के लिए स्थानीय युवाओं तथा पशु चिकित्सा विभाग को आगे आना पड़ा। यह प्रयास सराहनीय है, लेकिन इससे एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है कि आखिर हर साल मवेशियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय नागरिकों के भरोसे ही क्यों रह जाती है?
योजनाएं कागजों से निकलकर धरातल पर कब उतरेंगी….
गौवंश संरक्षण के लिए योजनाएं बनाना तभी सार्थक होगा, जब उनका लाभ जरूरतमंद पशुओं तक पहुंचे। प्रत्येक ग्रामीण क्षेत्र में मवेशियों के लिए सुरक्षित और स्थायी आश्रय, पर्याप्त चारा-पानी, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण तथा आपातकालीन उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है। साथ ही, संबंधित विभागों को जिम्मेदारी तय करते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करनी चाहिए।
मवेशी किसानों की आजीविका…..
ग्रामीण जीवन और सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी सुरक्षा केवल किसानों या स्थानीय युवाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन और समाज की साझा जवाबदेही है। सवाल यही है कि जब हर साल धान की फसल के समय यही समस्या सामने आती है, तो इसके स्थायी समाधान के लिए ठोस पहल कब होगी? आखिर कब बेजुबान मवेशियों को अस्थायी इंतजामों के भरोसे छोड़ने के बजाय सुरक्षित जीवन मिल सकेगा।






