
उदय सिंह
सीपत – छत्तीसगढ़ में सीएम हेल्पलाइन का दुरुपयोग करने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। जहां बिलासपुर जिले के सीपत थाने अंतर्गत ऋण पुस्तिका के लिए CM हेल्पलाइन में शिकायत करने वाले एक व्यक्ति ने ही निराकरण के लिए फोन करने वाली महिला अतिरिक्त तहसीलदार को अश्लील गाली गलौच की। पीड़िता की शिकायत पर सीपत पुलिस ने आरोपी के खिलाफ महिला की लज्जा भंग और शासकीय कार्य में बाधा सहित BNS की 4 धाराओं में अपराध दर्ज किया है। मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार सीपत तहसील की अतिरिक्त तहसीलदार सीएम हेल्पलाइन से मिली शिकायत की जांच कर रही थी। उसी दौरान सुबह सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर प्राप्त आरोपी साहेब लाल रात्रे जिनके द्वारा ऑनलाइन ऋण पुस्तिका (B-1) के लिए आवेदन का अवलोकन उनके द्वारा किया जा रहा था। जिसके नियमानुसार निराकरण के लिए अतिरिक्त तहसीलदार ध्रुव ने अपने शासकीय दूरभाष से शिकायतकर्ता के मोबाइल नंबर में संपर्क किया गया। इसी दौरान शिकायतकर्ता आवेश में आ गया और लज्जा का अनादर करने के आशय से अश्लील गाली-गलौच करने लगा। प्रार्थिया द्वारा विरोध करने पर उसने कॉल काट दी, जिसके पश्चात आरोपी द्वारा पुनः कॉल कर अश्लील गाली-गलौच की गई। जिससे व्यथित तहसीलदार ने आरोपी के खिलाफ सीपत थाने में विरुद्ध BNS की धारा 79, 132, 224 व 296 के तहत एफआईआर दर्ज कराई है। मामले में सीपत पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दि है।
CM हेल्पलाइन – मदद या हथियार?
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2023 से संचालित CM हेल्पलाइन 181 जनशिकायत पोर्टल को सुशासन का मॉडल माना गया था। जहा एक टोल-फ्री नंबर, एक टोकन, और सीधे CM कार्यालय से मॉनिटरिंग का सीधा लाभ हितग्राहियों को मिलता था। जिसके फलस्वरूप पहले साल में ही 5 लाख से अधिक शिकायतों का निराकरण हुआ। लेकिन तीसरे साल आते-आते यह पोर्टल अपने ही बोझ से दबने लगा है। बिलासपुर जिले के सीपत तहसील में महिला अतिरिक्त तहसीलदार के साथ हुई अभद्रता की घटना इस दुरुपयोग की पराकाष्ठा है। सीपत में घटी यह घटना सीएम हेल्पलाइन पोर्टल के दुरुपयोग की नई गाथा लिख रही ही। सरकार ने इस पोर्टल को आम नागरिकों की राजस्व, ऋण पुस्तिका, जाति, निवास जैसे मामलों में मदद के लिए बनाया है। अधिकारी शिकायतकर्ता को खुद फोन कर निराकरण करते हैं। लेकिन कई लोग इसे अधिकारियों पर दबाव बनाने और अभद्रता करने का हथियार बना रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों में इस घटना के बाद काफी रोष है। उनका कहना है कि एक महिला अधिकारी से इस तरह की भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।