छत्तीसगढ़बिलासपुर

राम भक्त हनुमान की भक्ति में डूबा अंचल, मंदिरों में अभिषेक ,पूजन, हवन के साथ भंडारे का आयोजन

सभी हनुमान मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना के साथ हवन किया गया इस अवसर पर शोभायात्रा भी निकाली गई और भंडारे का आयोजन किया गया

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य

भक्ति की शक्ति क्या होती है, इस के सबसे बड़े उदाहरण हैं बजरंगबली। भगवान श्री राम की भक्ति करते करते हनुमान स्वयं भगवान बन गए ।भगवान श्री राम के अनन्य भक्त और परम बलशाली बजरंगबली का जन्मोत्सव शुक्रवार को धूमधाम से मनाया गया। ग्यारहवे रूद्र अवतार हनुमान का जन्म चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को हुआ था। धार्मिक मान्यता अनुसार हनुमान जी का जन्म आज से करीब 58 हजार 112 वर्ष पहले चैत्र पूर्णिमा मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र मेष लग्न में सुबह करीब 6:00 बजे झारखंड राज्य के गुमला जिले के अंजन नाम के छोटे से पहाड़ी गुफा में हुआ था। वज्र के समान शरीर होने से इनका नाम बजरंगबली हुआ । इनके पालन पोषण में वायु देवता की महत्वपूर्ण भूमिका होने से इन्हें वायु पुत्र कहा जाता है। इस वर्ष 18 अप्रैल शाम 6:26 से ही पूर्णिमा की तिथि आरंभ हो गई थी इसीलिए गुरुवार से ही हनुमान जन्मोत्सव मनाने का क्रम आरंभ हो चुका था लेकिन हनुमान जन्मोत्सव का असली रंग तो शुक्रवार को ही नजर आया।

विगत कुछ वर्षों में हनुमान जन्मोत्सव बिलासपुर का सबसे बड़ा सार्वजनिक उत्सव बन चुका है। इस छोर से उस छोर तक अनुष्ठान ,भंडारा हवन ,पूजन का आयोजन इस बार भी किया गया। इस अवसर पर धर्म जागृति मंच द्वारा बुधवारी बाजार पंचमुखी हनुमान मंदिर से झांकी के साथ शोभायात्रा निकाली गई ।वही सभी हनुमान मंदिरों में विशेष अनुष्ठान के साथ हवन किया गया। हनुमान जयंती पर हनुमान जी की पूजा करने के साथ उन्हें सिंदूर का चोला अर्पित करने और जनेऊ पहनाने की भी परंपरा है। बाल ब्रह्मचारी हनुमान की प्रतिमा पर भक्तों ने सिंदूर का लेप चढ़ाया और उनके समक्ष हनुमान चालीसा, 1108 नामों का जाप, बजरंग बाण पाठ किया ।

बजरंगबली, मारुति ,अंजनी सुत, पवन पुत्र, संकट मोचन ,केसरी नंदन महावीर, शंकर सुवन की पूजा अर्चना आराधना में पूरा शहर डूबा नजर आया। भक्तों द्वारा इस जन्म उत्सव को विशेष बनाते हुए जगह-जगह भंडारे का आयोजन किया गया। मंदिरों में प्रार्थना, अभिषेक पूजन हवन के पश्चात प्रसाद वितरण का कार्यक्रम आरंभ हुआ जो देर रात तक चलता रहा। कई स्थानों पर भजन कीर्तन और चालीसा का पाठ भी किया गया।

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी हनुमान जन्मोत्सव पर सुबह से लेकर शाम तक विविध अनुष्ठान चलते रहे। सभी हनुमान मंदिरों में हनुमान जी की पूजा अर्चना के लिए भक्त उमड़ पड़े। हनुमान जन्मोत्सव पर मंदिरों की खास सजावट की गई वही हनुमान जी का विशेष श्रृंगार किया गया। मान्यता है कि हनुमान जन्मोत्सव पर बजरंगबली की पूजा अर्चना करने से सभी संकट हर जाते हैं। इसी कामना के साथ मंदिर पहुंचे भक्तों ने वंदन, चमेली का तेल, चांदी के नयन,जनेऊ ,हनुमान चालीसा अर्पित करते हुए उनकी पूजा-अर्चना की ।

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